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 हरियाणा बैंक घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन, पंचकूला और चंडीगढ़ के 7 ठिकानों पर छापेमारी, अब तक 16 गिरफ्तार

 
  • हरियाणा के 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई
  • पंचकूला और चंडीगढ़ समेत 7 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी
  • IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
  • सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी FD के जरिए घोटाले का आरोप
  • शेल कंपनियों और सोने की खरीद के जरिए रकम ठिकाने लगाने की आशंका
  • छापेमारी में वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य जब्त
  • मामले में अब तक 16 आरोपी गिरफ्तार
  • हरियाणा सरकार ने जांच CBI को सौंपी, कई अहम सुरागों की पड़ताल जारी

 चंडीगढ़: हरियाणा में बैंक घोटाले से जुड़े मामले में  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचकूला और चंडीगढ़ सहित कई स्थानों पर छापेमारी की है। सीबीआई के द्वारा 14 मई को यह कार्रवाई की गई। वहीं शुक्रवार यानि की 15 मई को ऑफिशियल जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।

सीबीआई के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक हरियाणा सरकार ने इस मामले की जांच एजेंसी को सौंपी थी। ऐसे आरोप हैं कि प्राइवेट बैंक  IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के लोक सेवकों के साथ मिलीभगत कर धोखाधड़ी के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

कुल 7 स्थानों पर चला तलाशी अभियान

सीबीआई के द्वारा कुल 7 स्थानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान आरोपियों के आवास, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, आभूषण विक्रेताओं की दुकानों, सरकारी धन के संदिग्ध लाभार्थियों के परिसर और जांच से जुड़े अन्य निजी ठिकानों समेत सात परिसरों पर एकसाथ छापे मारे गए। सीबीआई ने बयान में कहा कि, ''छापेमारी के दौरान, धोखाधड़ी और संदिग्ध गबन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण दस्तावेज और चीजें बरामद व जब्त की गईं। इनमें वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।'' एजेंसी के अनुसार, अब तक इस मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई ने जांच तेज कर दी है और कई अहम सुरागों की पड़ताल जारी है। 

क्या  है पूरा मामला

यह पूरा घोटाला हरियाणा सरकार के फंड के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के कई विभागों का पैसा (लगभग 590 करोड़ रुपये) फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नाम पर बैंक में जमा कराया गया था, लेकिन बैंक कर्मियों और निजी बिचौलियों ने मिलीभगत कर इस पैसे को फर्जी शेल कंपनियों और सोने की खरीद के जरिए ठिकाने लगा दिया।