{"vars":{"id": "128336:4984"}}

Success Story: श्वेता भारती ने दिन में की प्राइवेट जॉब..रात में UPSC की तैयारी, कड़े संघर्ष से बनी IAS    

 

 
Success Story: बिहार की बेटी श्वेता भारती ने रोजाना 9 घंटे की प्राइवेट जॉब के साथ न सिर्फ यूपीएससी एग्जाम क्रैक किया, बल्कि IAS बनीं। श्वेता की सक्सेस स्टोरी उन युवाओं के लिए उदाहरण हैं जो प्राइवेट जॉब के चलते सिविल सेवा में जाने का सपना छोड़ देते हैं। श्वेता बिहार के नालंजा जिले की रहने वाली हैं। साधारण परिवार से आने वाले श्वेता की स्कूलिंग पटना का ईशान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल से हुई है। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग में करियर बनाने की ठानी। भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल एंड टेलीकम्युनिकेशनंस इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री हासिल की। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

नौकरी के बाद भी सिविल सेवा का सपना नहीं छोड़ा 

इंजीनियरिंग करने के बाद, श्वेता दुविधा में थीं। एक तरफ परिवार की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ सिविल सेवा में जाने का सपना। उस वक्त उन्होंने सबसे कठिन फैसला लिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। उन्होंने विप्रो की नौकरी चुनी ताकि परिवार की जिम्मेदारी उठा सकें, लेकिन सिविल सेवा में जाने का सपना भी नहीं छोड़ा।

रात को करती थी UPSC की तैयारी

दृढ़ संकल्प और हार न मानने की जिद ही थी जिसने श्वेता को अपना सपना पूरा करने का हौसला दिया। वे दिन में 9 घंटे की प्राइवेट जॉब और रात में घर आकर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करती थीं। हालांकि जॉब के साथ प्रिपरेशन के लिए टाइम निकालना आसान नहीं था। फिर भी उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी।

पहले अटेंप्ट में क्रैक किया UPSC 

संघर्ष के बादल छटे और कामयाबी की सुबह हुई। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021 में श्वेता भारती ने 356वीं रैंक हासिल की। नालंदा जिले के छोटे से गांव से आने वाली श्वेता अब एक IAS अधिकारी थीं। उन्होंने पहले अटेंप्ट में यह सफलता हासिल की थी। वर्तमान में आईएएस श्वेता गृह राज्य के भागलपुर में असिस्टेंट कलेक्टर पद पर तैनात हैं।

सोशल मीडिया से दूरी

प्राइवेट जॉब के साथ यूपीएससी एग्जाम की प्रिपरेशन करना आसान नहीं था। लेकिन श्वेता के एक गोल्डन रूल ने उनकी काफी मदद की, वो सोशल मीडिया से दूरी। एक इंटरव्यू में उन्होंने इसका जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने सोशल मीडिया और ऑनलाइन वॉट्सएप ग्रुप्स से दूरी बना ली थी। कुछ समय के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल भी बंद कर दिया। इससे जो समय मिला वो प्रिपरेशन में लगा दिया। श्वेता की जर्नी दृढ़ निश्चय, हार न मानने की जिद और संघर्ष की मिसाल है।