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Success Story : शांभवी ने UPSC में हासिल की 46वीं रैंक, तीसरे प्रयास में मिली सफलता

 
Success Story : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू (पर्सनैलिटी टेस्ट) के आधार पर अंतिम परिणाम जारी कर दिया है। ऐसे में UP के जनपद बांदा के तिंदवारी कस्बे की  शांभवी तिवारी ने UPSC की परीक्षा में 46वीं रैंक हासिल कर परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। 

UPSC परीक्षा का परिणाम आते ही शांभवी ने अपने बाबा को फोन किया और बोली-बाबू जी, मैं आईएएस बन गई हूं। इस खुशी को सुन बाबा के आंखों के आंसू नहीं थम रहे थे। आपको बता दें कि शांभवी तिवारी तिंदवारी कस्बे के सराफा कारोबारी शिव सहाय तिवारी की पोती है। ब्लाक तिंदवारी के भुजरख गांव निवासी सुशील तिवारी उत्तराखंड में शिक्षक हैं। बेटी शांभवी उत्तराखंड में ही अपने माता-पिता के साथ शुरू से रही है।

शांभवी ने पंत नगर कृषि विश्वविद्यालय से हाईस्कूल से लेकर बीटेक तक की परीक्षा उत्तीर्ण की। घर में रहकर बिना कोचिंग ही शांभवी ने दूसरे प्रयास में इस परीक्षा में बाजी मार ली। मां निवेदिता ने शांभवी की मदद व प्रेरणास्रोत बनकर साथ दिया।

बाबा शिव सहाय ने बताया कि पौत्री शांभवी इकलौती संतान है। उसका दोपहर में फोन आया और कहा कि बाबूजी में आईएएस बन गई। एकबारगी तो विश्वास नहीं हुआ, पर जब उसने रैंक आदि बताई तो इतनी खुशी हुई कि उछल पड़े और आंखों से आंसू निकल आए। बेटी शांभवी के आईएएस बनने की खबर पूरे मुहल्ले गांव में फैल गई। बाबा शिव सहाय ने सभी का मुंह मीठा कराया।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

तिंदवारी के भुजरख गांव की शांभवी तिवारी ने अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी की 46वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले उन्होंने 445वीं रैंक हासिल की थी। इससे वह संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने दृढ़ निश्चिय कर फिर मेहनत से जुटीं और इस बार उन्हें यह सफलता मिली है।

दूसरे प्रयास में मिली थी ये रैंक

तिंदवारी के भुजरख गांव के शिक्षक सुशील तिवारी की बेटी शांभवी ने यूपीएससी की आल इंडिया रैंक में 46वीं रैंक हासिल की है। यह उनका तीसरा प्रयास था, दूसरे प्रयास में 445वीं रैंक हासिल की थी, जिसमें उन्हें भारतीय रेल प्रबंधन सेवा में रेल प्रबंधक का पद मिला था, लेकिन शांभवी इससे संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए फिर से मेहनत शुरू की। उन्हें अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था।

बीटेक में टापर

यूपीएससी की परीक्षाएं पूरी करने के बाद जब शुक्रवार को परिणाम आया तो वह उछल पड़ीं। परिणाम सुनकर शांभवी ही नहीं उनके स्वजन व जानने वाले भी काफी खुश हो गए। शांभवी ने दैनिक जागरण को बताया कि पिता सुशील तिवारी उत्तराखंड में एक इंटर कालेज के प्रवक्ता हैं। उन्होंने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की शिक्षा पंत नगर के एक कालेज से पूरी की। इसके बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया।

राज्यपाल से सम्मानित

बीटेक में गोल्ड मेडलिस्ट होने पर उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल ने सम्मानित किया गया। शांभवी ने घर से ही यूपीएससी की तैयारी की। शांभवी ने कहा कि अपनी मेहनत पर भरोसा हो तो लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। बाधाएं आती हैं पर उनका डटकर सामना करना पड़ता है।

इस वजह चुना IAS 

उन्होंने बताया कि प्रशासनिक सेवा में कुल 76 पद हैं, जिसमें से उन्हें 46वीं रैंक मिली है। वह आइएएस बनकर समाज सेवा करेंगी। महिलाओं, बेसहारों को उनका हक दिलाएंगीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय मां नवेदिता, पिता सुशील तिवारी, नाना आरपी अवस्थी, नानी रानी अवस्थी व चाचा सुनील तिवारी व ध्रुव कुमार को दिया है।