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सोमनाथ भारत की संस्कृति, आस्था और स्वाभिमान का अमर प्रतीक : कृष्ण पाल गुर्जर

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक विरासत को मिल रही नई पहचान
                                                                                                                                                                                                                       
- सैनिक कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व”
                                                                                                                                                                                                                       
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ से देशवासियों को किया संबोधित, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कुरुक्षेत्र से लाइव कार्यक्रम में हुए शामिल

 

 

फरीदाबाद, 11 मई। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर  ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, आस्था, ज्ञान, शौर्य और राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर भारतीय सभ्यता की उस अमर चेतना का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने अनेक आक्रमणों और संघर्षों के बावजूद अपनी पहचान, गौरव और आध्यात्मिक शक्ति को सदैव अक्षुण्ण बनाए रखा। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने सैनिक सैनिक कॉलोनी स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उनके साथ बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा, बड़खल विधायक धनेश अदलखा, एनआईटी विधायक सतीश फ़ागना, जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल, जिला परिषद चेयरमैन विजय लोहिया भी मौजूद रहे।

“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के तहत सर्वप्रथम सैनिक कॉलोनी स्थित कम्युनिटी सेंटर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, अन्य श्रद्धालु, एवं विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने बढ़चढ़ भाग लिया। कलश यात्रा सैनिक कॉलोनी के प्रमुख मार्गों से होते हुए सैनिक कॉलोनी के शिव मंदिर पहुंची। इसके पश्चात राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन सोमनाथ से ऑनलाइन माध्यम से में किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित किया। साथ ही मुख्यमंत्री हरियाणा नायब सिंह सैनी कुरुक्षेत्र से लाइव जुड़ें।

केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि सोमनाथ को हमारे शास्त्रों में प्रथम ज्योतिर्लिंग का स्थान प्राप्त है। यह केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय चेतना का जीवन प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार भारत की जनता ने इसे और अधिक भव्य स्वरूप में पुनर्निर्मित किया। यह हमारे आत्मविश्वास, राष्ट्रीय एकता और अडिग संकल्प का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। सरदार पटेल ने स्पष्ट कहा था कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के स्वाभिमान का पुनर्जागरण है। इसी संकल्प के परिणामस्वरूप 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में सोमनाथ मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, जो स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जन्म का प्रतीक बनी।

केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि सोमनाथ मंदिर की वास्तुकला भारतीय शिल्प और स्थापत्य कला की महान परंपरा को दर्शाती है। समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर भारतीय संस्कृति की भव्यता और आध्यात्मिक शक्ति का संदेश पूरे विश्व को देता है। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और सतत सभ्यता का राष्ट्र है। हमारे वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, दर्शन, शास्त्र और वैज्ञानिक परंपराएं विश्व को दिशा देने का कार्य करती रही हैं। “वसुधैव कुटुंबकम” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे विचार भारत की विश्व मानवता के प्रति उदात्त सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के महापुरुषों, संतों और वीर योद्धाओं ने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप और गुरु गोबिंद सिंह जैसे वीरों ने राष्ट्र गौरव और धर्म रक्षा का संदेश दिया, वहीं संत परंपरा ने समाज को एकता, सेवा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया।
                                                                                                                                                                                                                              कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और इतिहास से जोड़ा जाए। आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। हमें अपनी भाषा, परंपराओं, त्योहारों और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” हमें यह प्रेरणा देता है कि चाहे कितनी भी बड़ी चुनौतियां आएं, भारत की संस्कृति और आत्मा को कभी पराजित नहीं किया जा सकता। यह आयोजन राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक जागरण और आत्मगौरव का संदेश देता है। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे भारत की सांस्कृतिक धरोहर, आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।



भव्य कलश यात्रा व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से शिवमय हुआ मंदिर प्रांगण
कार्यक्रम के दौरान निकाली गई भव्य कलश यात्रा एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे मंदिर प्रांगण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर भगवान शिव के जयकारों के साथ वातावरण को शिवमय कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों द्वारा शिव लीला की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें उपस्थित श्रद्धालुओं ने खूब सराहा। 

सोमनाथ मंदिर की 1000 वर्ष की गौरव गाथा को प्रदर्शनी के माध्यम से किया प्रदर्शित                                                                                                            कार्यक्रम स्थल पर सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सोमनाथ मंदिर की 1000 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी के माध्यम से श्रद्धालुओं को सोमनाथ मंदिर के इतिहास, उसके पुनर्निर्माण, सांस्कृतिक महत्व तथा भारत की सनातन परंपरा और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों की जानकारी दी गई। श्रद्धालुओं ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर सोमनाथ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से जाना।                                                                                                                                                                                                                               

इस अवसर पर उपायुक्त (डीसी) आयुष सिन्हा, बड़खल एसडीएम त्रिलोक चंद, सीटीएम अंकित कुमार, डीआईपीआरओ मूर्ति दलाल, पार्षद सुमन बाला, हरिकिशन बिरोती, जगत सिंह भड़ाना, हरेंद्र भड़ाना, अंजू भड़ाना कार्यक्रम आयोजक राकेश धुनना सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।