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एमडीयू प्रशासन की लापरवाही से अटके पीजीडीटी विद्यार्थियों के परिणाम, एएसएपी ने दी आंदोलन की चेतावनी

 
रोहतक, 13 अप्रैल 2026: महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता और आपसी तालमेल की कमी के कारण सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। हिंदी विभाग के पीजीडीटी (अनुवाद में डिप्लोमा) सत्र 2024-25 के विद्यार्थियों ने आज आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन 'असोसिएशन ऑफ स्टूडेंट फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स' (एएसएपी) के प्रदेश अध्यक्ष दीपक धनखड़ के नेतृत्व में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया। विद्यार्थियों का आरोप है कि उन्होंने अपनी परीक्षा और शोध प्रबंध से संबंधित सभी शुल्क समय पर जमा करवा दिए थे, लेकिन विश्वविद्यालय के एक लिपिक (क्लर्क) की घोर लापरवाही के कारण वह राशि विश्वविद्यालय के खाते में जमा ही नहीं हुई। अब विश्वविद्यालय प्रशासन उसी शुल्क को फिर से लेट फीस के साथ जमा करने का दबाव बना रहा है, जिससे विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इस गंभीर मामले को लेकर एएसएपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक धनखड़ के नेतृत्व में सभी विद्यार्थी एकत्रित होकर अधिष्ठाता अकादमिक मामले (डीन एकेडमिक अफेयर्स), डॉ. सुरेश चंद्र मलिक के पास गए और उन्हें इस समस्या के समाधान हेतु ज्ञापन सौंपा। डीन एकेडमिक अफेयर्स ने समस्या के जल्द निवारण का आश्वासन दिया था। विश्वविद्यालय की शिकायत निवारण समिति ने करीब 10 दिन पूर्व ही यह स्पष्ट कर दिया था कि जिन विद्यार्थियों ने लिपिक को शुल्क दिया था, उनका परिणाम बिना दोबारा शुल्क लिए जारी किया जाएगा। इसके बावजूद, आज जब छात्र अकादमिक शाखा पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि छात्रों के अवार्ड ही गायब हो गए हैं। यह प्रशासनिक तंत्र की आपसी खींचतान और मिलीभगत का जीता-जागता उदाहरण है, जिसकी सजा निर्दोष छात्र भुगत रहे हैं।

दीपक धनखड़ ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों के भीतर विद्यार्थियों के परिणामों का समाधान नहीं किया गया, तो समस्त विद्यार्थी एएसएपी के बैनर तले कुलपति कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम विद्यार्थियों के हितों के लिए संघर्ष करें और छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाली इस प्रशासनिक व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकें।

इसके अतिरिक्त, दीपक धनखड़ ने विश्वविद्यालय में स्थायी कर्मचारियों के अभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिंदी विभाग में किसी भी स्थायी लिपिक (क्लर्क) की नियुक्ति न होने के कारण आगामी परीक्षाओं में छात्रों को रोल नंबर प्राप्त करने और अन्य शुल्क संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। धनखड़ ने राज्य सरकार से डीन एकेडमिक के माध्यम से मांग की है कि विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भारी कमी को देखते हुए जल्द से जल्द स्थायी भर्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि भविष्य में किसी भी विद्यार्थी को इस प्रकार की अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।

इस अवसर पर जाट कॉलेज के पूर्व प्रधान एवं एएसएपी के जिला अध्यक्ष आशीष मलिक, जीता प्रधान विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी छात्रों की इस जायज मांग का पूर्ण समर्थन किया।

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान निकिता, तरुण, योगेश कुमार, अंकुश, सुमित, साहिल, अजय, रोहित, कन्नू, अंजू, ज्योति, अंजलि और पारुल आदि विद्यार्थी उपस्थित रहे।