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हरियाणा एसीएस डॉ. सुमिता मिश्रा ने अवैध नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश, लिंग अनुपात सुधारने के लिए अभियान किया तेज

 

चंडीगढ़ - हरियाणा सरकार ने जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार के लिए राज्यभर में अभियान को और तेज कर दिया है। हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को अवैध लिंग जांच और इससे जुडी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त एवं समन्वित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने यह निर्देश आज यहां ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम के तहत आयोजित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।

 

डॉ. मिश्रा ने स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पुलिस, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन तथा आयुष विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि  सभी विभाग आपसी समन्वय को और मजबूत करें, फील्ड निरीक्षण बढ़ाएं तथा लिंग चयन से संबंधित गैर-कानूनी गतिविधियों पर निगरानी तंत्र को और सख्त बनाएं।

 

उन्होंने अधिकारियों को गर्भपात मामलों की रिवर्स ट्रैकिंग में तेजी लाने, एमटीपी किट की अवैध बिक्री में शामिल मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच करने तथा बिना अनुमति संचालित अस्पतालों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों को अवैध लिंग जांच से जुड़े संगठित नेटवर्क को खत्म करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन तेज करने के भी निर्देश दिए।

 

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि हरियाणा में वर्तमान में 1,206 पंजीकृत एमटीपी सेंटर हैं, जिनमें से 201 को नियमों के उल्लंघन पर बंद किया जा चुका है, जबकि शेष 1,005 सेंटर कड़ी निगरानी में संचालित हो रहे हैं। वर्ष 2025 और 2026 के दौरान 1,240 निरीक्षण किए गए तथा वित्त वर्ष 2025-26 में नियमों का उल्लंघन करने वाले केंद्रों को 58 नोटिस जारी किए गए। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार गर्भपात के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। 12 सप्ताह से कम अवधि वाले एमटीपी मामलों की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में 47,730 थी, जो घटकर 2025-26 में 43,443 रह गई। इसी प्रकार 12 सप्ताह से अधिक अवधि वाले गर्भधारण के मामलों की संख्या 4,291 से घटकर 3,841 हो गई है।

 

एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के तहत जनवरी से मार्च 2026 के बीच राज्य के सभी जिलों में 606 गर्भपात/एमटीपी मामलों की रिवर्स ट्रैकिंग की गई। इस रणनीति से अधिकारियों को अवैध गतिविधियों की पहचान करने और उच्च जोखिम वाले मामलों पर अधिक प्रभावी निगरानी रखने में सहायता मिली है। अक्टूबर 2024 से अब तक रिवर्स ट्रैकिंग सिस्टम के आधार पर अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों, झोलाछाप चिकित्सकों, केमिस्टों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ 78 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

 

बैठक में हरियाणा में जन्म के समय लिंग अनुपात में हुए उल्लेखनीय सुधार पर भी चर्चा की गई। वर्ष 2010 में प्रति 1,000 लड़कों पर 838 लड़कियों का अनुपात बढ़कर वर्ष 2025 में 923 तक पहुंच गया है, जो राज्य का अब तक का सर्वाेच्च स्तर है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2015 में शुरू किए गए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत अब तक 60,000 से अधिक बेटियों को बचाया जा चुका है।

 

पंचकूला, फतेहाबाद, पानीपत और करनाल सहित कई जिलों ने वर्ष 2025 तक लिंग अनुपात सुधारने में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जो लगातार चलाए जा रहे  अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का परिणाम है। हालांकि, डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों का लिंग अनुपात अभी भी राज्य औसत से नीचे है, वहां विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

उन्होंने गर्भपात किट की अवैध बिक्री को गंभीरता से लेते हुए राज्यभर के मेडिकल स्टोरों की जांच तेज करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि केवल वर्ष 2025 में ही 44 केमिस्ट शॉप सील की गईं, 59 एफआईआर दर्ज हुईं तथा 6,000 से अधिक एमटीपी किट जब्त की गईं।

 

दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए राज्य सरकार ने एफडीए के माध्यम से पंजीकृत निजी एमटीपी केंद्रों को टैबलेट मिफेप्रिस्टोन की सीधी आपूर्ति भी शुरू की है।

 

डॉ. मिश्रा ने आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम के सहयोग से ‘सहेली नेटवर्क’ के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले फील्ड स्टाफ की जवाबदेही तय की जाएगी, जबकि उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कम लिंग अनुपात वाले गांवों और जिलों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत धार्मिक नेताओं, सामुदायिक संगठनों और स्थानीय संस्थाओं को भी अभियान से जोड़कर बेटियों के सम्मान और समान अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

 

डॉ. मिश्रा ने सुझाव दिया कि विवाह समारोह संपन्न कराने वाले पंडित, मौलवी और ग्रंथी भी नवविवाहित जोड़ों को कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच के खिलाफ संकल्प दिलाएं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग को गांव स्तर पर आउटरीच अभियान तेज करने तथा मुख्यालय को जमीनी स्थिति से लगातार अवगत कराने के निर्देश दिए।

 

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक पीसी और पीएनडीटी एवं एमटीपी अधिनियम के तहत राज्य में 1,300 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इस दौरान हरियाणा में 400 से अधिक अंतरराज्यीय छापेमारी अभियान चलाए गए, हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले लगभग 300 केंद्रों के पंजीकरण रद्द किए गए।

 

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि हरियाणा ने पिछले एक दशक में बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन कन्या भ्रूण हत्या को समाज से पूरी तरह समाप्त करने के लिए निरंतर सतर्कता और जनभागीदारी आवश्यक है।