वाहन चालकों को बड़ी राहत, टोल वसूली के लिए नया सिस्टम होगा लागू!
नए नियम इसी माह लागू होने की संभावना
सरकार ने इस नीति को Pay as per Road Quality के सिद्धांत पर तैयार किया है। यानी सड़क की गुणवत्ता, सुविधा और चालू हिस्से के हिसाब से ही टोल तय किया जाएगा। यह नया नियम इसी माह फरवरी से पूरे देश में लागू होने की संभावना है। इसके बाद कई एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स में सीधी कटौती देखने को मिलेगी।
नया टोल नियम क्या है
अब तक एक्सप्रेसवे पर चलने वाले वाहन चालकों को सामान्य नेशनल हाईवे की तुलना में करीब 25 प्रतिशत ज्यादा टोल देना पड़ता था। चाहे सड़क पूरी तरह बनी हो या नहीं, टोल दरें लगभग एक जैसी रहती थीं। नए नियम में इस व्यवस्था को बदला गया है। अब टोल की दरें सड़क की स्थिति, चल रहे निर्माण कार्य और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर तय होंगी।
अगर किसी एक्सप्रेसवे के किसी हिस्से में मरम्मत या निर्माण कार्य चल रहा है, या वहां सर्विस रोड उपलब्ध नहीं है, तो उस हिस्से का टोल ‘50 प्रतिशत तक कम’ किया जा सकता है। इससे अधूरी सड़क पर पूरा पैसा वसूलने की शिकायत खत्म होगी।
GPS आधारित Toll System से बड़ा बदलाव
सरकार धीरे-धीरे GPS टोलिंग / GNSS टोल सिस्टम लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। इस तकनीक के आने से टोल वसूली का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। इस सिस्टम में वाहन चालकों को पूरे एक्सप्रेसवे का टोल नहीं देना होगा। जितनी दूरी तय की जाएगी, उतना ही टोल अपने आप FASTag या बैंक अकाउंट से कट जाएगा। इससे ओवरचार्जिंग की समस्या खत्म होगी और टोल भुगतान ज्यादा सटीक होगा।
अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब पूरी वसूली नहीं
पहले अगर कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह से चालू नहीं होता था, फिर भी उससे पूरे रूट का टोल लिया जाता था। कई बार एक्सप्रेसवे का सिर्फ आधा हिस्सा ही तैयार होता था, जबकि बाकी हिस्से पर काम चलता रहता था। इसके बावजूद यात्रियों को पूरी लंबाई के हिसाब से शुल्क देना पड़ता था। नए नियमों के तहत अब ऐसा नहीं होगा।
अगर कोई एक्सप्रेसवे पूरा नहीं बना है, तो सिर्फ उसी हिस्से पर टोल लिया जाएगा जो पूरी तरह चालू और उपयोग के लायक है। इसके अलावा, उस हिस्से का टोल भी एक्सप्रेसवे रुट पर नहीं, बल्कि सामान्य नेशनल हाईवे रेट पर वसूला जाएगा।
दरअसल, सरकार का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर ज्यादा टोल इसलिए लिया जाता था क्योंकि ये सड़कें तेज, सुरक्षित और बिना रुकावट यात्रा के लिए बनाई जाती हैं। बेहतर डिजाइन, कम ट्रैफिक सिग्नल, और अच्छी सड़क गुणवत्ता के कारण समय की बचत होती है।
लेकिन जब एक्सप्रेसवे अधूरा होता है और जगह-जगह निर्माण कार्य चलता रहता है, तो वह सुविधा पूरी तरह नहीं मिल पाती। ऐसे में भी ज्यादा टोल वसूलना यात्रियों को अनुचित लगता था। यही वजह है कि सरकार ने अब टोल नीति में बदलाव किया है।
आम जन हो क्या फायदा होगा
नए नियम से सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा। अब उन्हें अधूरी सुविधा के लिए पूरा और ज्यादा टोल नहीं देना पड़ेगा। रोजाना एक्सप्रेसवे से सफर करने वाले लोग, ट्रांसपोर्ट कारोबारी और लंबी दूरी के यात्री सभी को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही टोल वसूली में पारदर्शिता बढ़ेगी। यात्रियों को साफ तौर पर पता होगा कि वे किस दूरी और किस सुविधा के लिए पैसा दे रहे हैं।
इस नई टोल नीति से सबसे अधिक फायदा दिल्ली-मेरठ, लखनऊ-आगरा, मुंबई-पुणे और बुंदेलखंड जैसे रूट्स पर Toll Tax पहले के मुकाबले कम हो सकता है। इससे लंबी दूरी की यात्रा ज्यादा किफायती बनेगी।