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हरियाणा में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल, अस्पताल के बाहर महिला ने बच्चे को दिया जन्म, हरियाणा मानवधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

 फरीदाबाद: हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने बल्लभगढ़ के एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के बाहर गर्भवती महिला द्वारा बच्चे को जन्म देने की घटना पर गंभीर संज्ञान लिया है। इस मामले ने हरियाणा में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
 

फरीदाबाद: हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने बल्लभगढ़ के एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के बाहर गर्भवती महिला द्वारा बच्चे को जन्म देने की घटना पर गंभीर संज्ञान लिया है। इस मामले ने हरियाणा में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अस्पताल परिसर के बाहर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा

मीडिया रिपोर्ट्स और शिकायत के आधार पर HHRC के चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा ने इस मामले में कार्रवाई शुरू की। आरोप है कि 15 और 16 मई की रात बल्लभगढ़ के सेक्टर-3 स्थित सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के बाहर खुले में महिला को बच्चे को जन्म देना पड़ा। आयोग ने इसे मानव गरिमा, जीवन के अधिकार और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव पीड़ा होने पर महिला PHC पहुंची थी, लेकिन वहां अस्पताल का मुख्य गेट बंद मिला। आरोप है कि उस समय डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और इमरजेंसी सहायता मौजूद नहीं थी। मजबूरी में महिला को अस्पताल परिसर के बाहर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।

टॉर्च की रोशनी में सार्वजनिक स्थान पर कराया गया प्रसव

बताया गया कि टॉर्च की रोशनी में खुले सार्वजनिक स्थान पर प्रसव कराया गया, जबकि परिजन व्हीलचेयर की व्यवस्था कर मेडिकल सहायता आने का इंतजार करते रहे। अखबारों में प्रकाशित तस्वीरों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि पहली नजर में यह घटना बेहद परेशान करने वाली और अमानवीय प्रतीत होती है।

आयोग ने कहा कि यह मामला जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और मुफ्त प्रसव सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाता है। HHRC ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन माना जाएगा, जिसमें जीवन, गरिमा, स्वास्थ्य और आपातकालीन चिकित्सा सहायता का अधिकार शामिल है।

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

जस्टिस ललित बत्रा ने इस मामले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, फरीदाबाद के सिविल सर्जन और PHC प्रभारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या महिला को JSSK योजना का लाभ देने से वंचित किया गया और मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में मुआवजे की सिफारिश क्यों न की जाए। सभी संबंधित अधिकारियों को 19 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।