गैनोडर्मा मशरूम की खेती के लिए सोनीपत के वीरेंद्र बाजवान को मिला 'उद्यान रत्न अवार्ड'
सोनीपत के छोटे से गांव गुढ़ा-गोहाना से निकलकर वीरेंद्र ने मोरनी को अपनी कर्मभूमि बनाकर इतिहास रच डाला। बीते 15 सालों की कड़ी मेहनत में उनकी पत्नी दर्शन देवी, बेटी इंजीनियर स्वाति सैन और बेटे हरिज्ञान बाजवान ने हर कदम पर उनका साथ दिया। इससे पहले भी मुख्यमंत्री कई मौकों पर वीरेंद्र बाजमान की लगन और मेहनत की तारीफ कर चुके हैं।
वीरेंद्र बाजमान चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सफल स्टार्अप
वीरेंद्र बाजमान एक किसान होने के साथ-साथ एक सफल उद्यमी भी हैं। उन्होंने 'वीएमडब्लयू न्यूट्रासूटिकल' नामक कंपनी स्थापित की है। साल 2009 में मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू), हिसार के एक सफल स्टार्टअप हैं।
एचएयू के एबिक सेंटर की 'सफल योजना' के अंतर्गत 15 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और 45 दिन की ट्रेनिंग लेकर उन्होंने अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। आयुष विभाग और खाद्य एवं औषध प्रशासन से मान्यता प्राप्त कर वे औषधीय मशरूम से विश्व स्तरीय दवाइयां तैयार कर रहे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करने की भी योजना है। राज्य सरकार ने उन्हें मशरूम प्रमोशन कमेटी का गैर-सरकारी सदस्य भी मनोनीत किया है।
वार्टिकल सिस्टम से घरों और छतों पर भी मशरूम की खेती
बाजवान का मानना है कि कृषि योग्य भूमि लगातार कम हो रही है, ऐसे में वर्टिकल सिस्टम और नियंत्रित विधियां अपनाकर घरों व छतों पर भी मशरूम की खेती की जा सकती है। इस कार्य में उन्हें महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय (एमएचयू), करनाल और मुरथल स्थित क्षेत्रीय मशरूम अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों का निरंतर मार्गदर्शन मिलता है।
एमएचयू के कुलपति प्रो. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने कहा कि वीरेंद्र ने गैनोडर्मा व शीटाके जैसी उच्च मूल्यवान प्रजातियों से उत्पादन को नया आयाम दिया है। वहीं, एचएयू के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने युवाओं व किसानों से अपील की है कि वे भी वीरेंद्र की तरह अपने उत्पादों में मूल्य संवर्धन कर अपना उद्यम स्थापित करें।