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 प्रदेश सरकार ने किसान रजिस्ट्री की दिशा में बढ़ाया कदम, कॉमन सर्विस सेंटरों पर होगा मुफ्त डिजिटल पंजीकरण

 
 

 

चंडीगढ़, 15 मई-- हरियाणा सरकार ने राज्य भर के कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी) के माध्यम से श्किसान रजिस्ट्रीश् तैयार करने के काम में तेजी लाने का निर्णय लिया है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस पहल से सरकारी सेवाएं सीधे ग्रामीण स्तर पर पहुंचेंगी। केंद्र सरकार की 'एग्रीस्टैक' पहल और 'पीएम-किसान' योजना के तहत, किसान पंजीकरण और ई-केवाईसी का काम अब प्रदेश भर में सीएससी के माध्यम से किया जाएगा। यह डेटाबेस योजनाओं, सब्सिडी और सेवाओं को सीधे लक्षित लाभार्थियों तक पहुँचाने में सक्षम बनाएगा, जिससे किसान कल्याण और कृषि नियोजन को मजबूती मिलेगी।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, असम और ओडिशा सहित कई राज्यों में 2.8 करोड़ से अधिक किसानों का सफलतापूर्वक पंजीकरण पहले ही कर लिया है। इसी अनुभव का लाभ उठाते हुए, हरियाणा अपनी किसान रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक तेज और सरल बनाना चाहता है।

वित्त आयुक्त  के निर्देशों की पालना करते हुए हाल ही में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि पीएम-किसान ई-केवाईसी के लिए प्रति किसान 15 रुपये का सेवा शुल्क पूरी तरह से सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। किसानों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। सीएससी केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों से किसी भी तरह की राशि न वसूलें।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस पहल से किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल सत्यापन, किसान रजिस्ट्री अपडेट और पीएम-किसान से जुड़ी सेवाएं अब गांव के स्तर पर ही उपलब्ध होंगी, जिससे सरकारी योजनाओं में अधिक पारदर्शिता आएगी और यह सुनिश्चित होगा कि लाभ सीधे और कुशलता से पात्र किसानों तक पहुंचे।

प्रदेश सरकार की इस पहल को हरियाणा के किसानों के लिए डिजिटल सुशासन और सरल सेवा वितरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।