RTE और चिराग योजना का पैसा लंबित, NISA ने हरियाणा सरकार को दी चेतावनी
चंडीगढ़: निजी स्कूलों के संगठन National Independent Schools Alliance (NISA) ने हरियाणा सरकार से रूल 134-ए, शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 12(1)(c), चिराग योजना और अन्य सरकारी शिक्षा योजनाओं के तहत लंबित प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) राशि तुरंत जारी करने की मांग की है। संगठन का दावा है कि वर्ष 2015 से कई योजनाओं का भुगतान अब तक बकाया है। सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में NISA के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि निजी स्कूल सरकार की विभिन्न छात्र कल्याण योजनाओं के तहत गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त प्रवेश और अन्य सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं, लेकिन सालों से उन्हें निर्धारित भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण हजारों निजी शिक्षण संस्थान गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि 15 जून तक बकाया राशि जारी नहीं की गई तो निजी स्कूल और उनके संगठन कानूनी रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
स्कूलों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
कुलभूषण शर्मा ने कहा कि स्कूलों को शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, भवन रखरखाव, परिवहन, बिजली-पानी और अन्य संचालन संबंधी खर्च अपने सीमित संसाधनों से उठाने पड़ रहे हैं। इससे स्कूलों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
ब्याज सहित भुगतान की मांग
NISA ने मांग की है कि 2014-15 शैक्षणिक सत्र से लेकर अब तक रूल 134-ए योजना के तहत लंबित सभी भुगतान ब्याज सहित जारी किए जाएं। संगठन ने यह भी कहा कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत सरकार को प्रति छात्र 1,750 रुपये प्रतिमाह की दर से प्रतिपूर्ति राशि बिना किसी और देरी के जारी करनी चाहिए।
EWS बच्चों के दाखिलों पर पड़ सकता है असर
कुलभूषण शर्मा ने कहा कि समय पर भुगतान होने से निजी स्कूलों और सरकार के बीच विश्वास मजबूत होगा तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के दाखिलों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की ताकि शिक्षा योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक निर्बाध रूप से पहुंचता रहे।