हरियाणा में 27 अप्रैल से ऑटो मोड में होंगे प्रॉपर्टी के इंतकाल, अब नहीं काटने पड़ेंगे पटवारियों के चक्कर
राजस्व विभाग ने रजिस्ट्री व इंतकाल व्यवस्था में बड़ा सुधार किया है। सोमवार से पूरे प्रदेश में ऑटोमोड में रजिस्ट्री होते ही प्रॉपर्टी का इंतकाल भी हो जाएगा। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार, कोई भी व्यक्ति निर्धारित फीस जमा करवाकर इंतकाल ले सकता है। कोई भी इंतकाल अप्रैल महीने के अंत तक बकाया नहीं रहेगा। इससे एक प्रॉपर्टी को एक से अधिक व्यक्तियों को बेचने की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। जिले में अभी 2600 इंतकाल पेंडिंग है,जबकि प्रदेश भर में पेंडिंग इंतकालों की संख्या हजारों में है। Haryana News
जाना होता था पटवार भवन
जानकारी के मुताबिक, अभी तक लोगों को रजिस्ट्री करवाने के बाद इंतकाल के लिए पटवार भवन में जाना पड़ता है । जमीन की रजिस्टरी करवाने के बाद इंतकाल करवाना होता है। इसके लिए लोगों को पटवारियों के चक्कर काटने पड़ते थे और चक्कर के साथ-साथ उन्हें अपनी जेब भी ढिली करनी पड़ती थी। उनकी खर्चा राशि हजारों रूपये में पहुंच जाती थी।
मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन के आलाधिकारियों के पास इस किस्म की शिकायतों का ढेर लगा हुआ होता था। वहीं इंतकाल के लिए लोगों को मुंह मांगी रकम न देने पर सालों लग जाते थे। अब यह झंझट खत्म कर दिया गया है। लोग आन रजिस्टरी करवाने के साथ ही अब निर्धारित फीस जमा करवाकर इंतकाल के लिए आवेदन कर सकते हैं। Haryana News
जानकारी के मुताबिक, तहसील कार्यालय से इंतकाल की कापी प्राप्त की जा सकेगी। यह कार्य शुरू होने से लोगों में समय की बचत होगी। पटवारियों के चक्कर भी नहीं काटने पड़ेंगे व इंतकाल के चक्कर में जेबें भी ढिल्ली नहीं होंगी।
मिली जानकारी के अनुसार, कई लोग रजिस्ट्री के बाद इंतकाल नहीं करा पाते थे। ऐसे में कुछ लोग रजिस्ट्री कराने के बाद भी जमीन को दूसरे लोगों को बेच देते थे। अब तुरंत इंतकाल होने से इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लग जाएगा और फ्राड से भी बच सकेंगे। Haryana News
ये होता है इंतकाल?
जानकारी के मुताबिक, जमीन की रजिस्ट्री के बाद रिकार्ड में खरीदार का नाम दर्ज करना ही इंतकाल होता है। इंतकाल के बाद संबंधित जमीन को पहले वाला मालिक दूसरी जगह नहीं बेच सकता। जब रजिस्ट्री होती है तो तहसील में यह देखा जाता है कि जमीन किसके नाम है। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार, जब तक इंतकाल नहीं होगा, तब तक जमीन बेचने वाले के ही नाम रहती है। इंतकाल पटवारी कंप्यूटर में दर्ज करता है। पुराने और नए रिकार्ड का मिलान कानूनगो करता है। इसके बाद तहसीलदार उसे फाइनल करता है।