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यात्रा के दौरान उल्टी और चक्कर से मिलेगी राहत, MDU के वैज्ञानिकों ने बनाई मेडिकेटेड च्युइंग गम

 
 

रोहतक: हरियाणा के रोहतक स्थित Maharshi Dayanand University (MDU) के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के शोधकर्ताओं ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ताओं को यात्रा के दौरान होने वाली मोशन सिकनेस (Motion Sickness) से बचाव के लिए विकसित की गई मेडिकेटेड च्युइंग गम के लिए भारतीय पेटेंट मिला है। यह नवाचार सड़क, रेल और हवाई यात्रा के दौरान होने वाली उल्टी, मतली, चक्कर और बेचैनी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करेगा।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी पंकज नैन ने बताया कि यह विशेष च्युइंग गम पारंपरिक दवाओं का एक आसान और उपयोगकर्ता-अनुकूल विकल्प है। इसे बिना पानी के इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यात्रियों को सफर के दौरान तुरंत राहत मिलने की संभावना है। यह पेटेंट फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के अध्यक्ष प्रो. दीपक कौशिक, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीत मित्तल और पूर्व शोधार्थी डॉ. प्रेरणा कौशिक को उनके संयुक्त शोध कार्य के लिए प्रदान किया गया है। शोधकर्ताओं ने पेटेंट स्वीकृति पत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया और रजिस्ट्रार प्रो. संदीप बंसल को सौंपा।

कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया ने इस उपलब्धि पर शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि समाज की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान करने वाला शोध आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध प्रतिष्ठा को मजबूत करने के साथ-साथ समाज को भी प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाते हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं को इस तकनीक के व्यवसायीकरण और वित्तीय सहायता के अवसर तलाशने के लिए भी प्रोत्साहित किया। रजिस्ट्रार प्रो. संदीप बंसल ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार ऐसा शोध वातावरण तैयार कर रहा है जो नवाचार और बहु-विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नई तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नवाचार मोशन सिकनेस की दवा प्रोमेथाजीन (Promethazine) की एक बड़ी कमी को दूर करता है। प्रोमेथाजीन का कड़वा स्वाद कई बार मरीजों को दवा लेने से रोकता है और कुछ मामलों में मतली की समस्या को और बढ़ा सकता है। इसी समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने विशेष तकनीक की मदद से स्वाद-रहित मेडिकेटेड च्युइंग गम विकसित की है।

यह च्युइंग गम मुंह के अंदर मौजूद बुक्कल म्यूकोसा (Buccal Mucosa) के जरिए दवा को सीधे शरीर में पहुंचाती है। इससे दवा तेजी से अवशोषित होती है और असर भी जल्दी शुरू होता है। साथ ही यह पाचन तंत्र से होकर नहीं गुजरती, जिससे इसकी प्रभावशीलता बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि च्युइंग गम चबाने की प्रक्रिया स्वयं भी मतली और चक्कर जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक मानी जाती है। इसके अलावा यह उन मरीजों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है जिन्हें गोलियां निगलने में कठिनाई होती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में यह पेटेंटेड उत्पाद बड़े पैमाने पर बाजार में उतारा जा सकता है और मोशन सिकनेस से परेशान लोगों के लिए एक प्रभावी, सुविधाजनक और यात्रा-अनुकूल उपचार विकल्प बन सकता है।