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Haryana: कुरुक्षेत्र मेले में पहुंचा थारपारकर नस्ल का 'चांद',  5 बार का चैंपियन खाता है हलवा-पुरी 

 
Haryana: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में KDB मेला ग्राउंड में चल रहे राज्य स्तरीय पशु मेला जोरों शोरों से चल रहा है और देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। आए दिन इस मेले में लाखों-करोड़ों के पशु इस मेले में भाग लेने आ रहें है, जिसके चलते इस मेले को चार-चंद लग गए है। हाल ही में इस मेले में थारपारकर नस्ल का बुल (सांड) पहुंचा जिसने सभी का ध्यान अपनी और आकर्षित किया है। इस बुल का नाम चांद है, जिसे फतेहाबाद जिले के मोहम्मदपुर रोही गांव के रहने वाले लोकेश गुर्जर लेकर आए। 

जानकारी के मुताबिक, 4 साल के चांद का वजन 800 KG है जिसकी मजबूत कद-काठी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। Haryana News

मिली जानकारी के अनुसार, पशुपालक लोकेश गुर्जर ने बताया कि उन्हे चांद गुजरात से गिफ्ट में मिला था। तब उसकी उम्र सिर्फ 8 महीने की थी। चांद ने कभी निराश नहीं किया। चांद जिस भी मेले में गया, कभी खाली नहीं लौटा। चांद 5 बार का चैंपियन रह चुका है। महेंद्रगढ़ में हुई चैंपियनशिप में चांद फर्स्ट पोजीशन पर रहा था। मैंने इसे देसी खुराक देकर पाला है। अब थारपारकर ब्रीड बहुत कम देखने को मिल रही है।

लोकेश ने आगे बताया कि थारपारकर नस्ल पाकिस्तान के सिंध और इंडिया के राजस्थान में जैसलमेर में देखने को मिलेगी। इस देसी नस्ल को थारपारकर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि ये रेगिस्तान के बड़े-बड़े टीले आसानी से पार कर लेती है। ये नस्ल रेगिस्तान की गर्मी और सर्दी को सहन कर लेती है। Haryana News

ये सब खाता है चांद

जानकारी के मुताबिक, लोकेश ने बताया कि चांद हलवा, पुरी और चूरी सब खाता है। चांद दिन में 2 बार हरा चारा खाता है। रात को उसे खल-बिनौला, दलिया, गुड़ और चारे में गेहूं का आटा मिला दिया जाता है। चांद हर रोज 3 लीटर देसी गाय का दूध पीता है। इसमें उसे मल्टीविटामिन और सप्लीमेंट भी दिया जाता है। चांद को हफ्ते में 2 या 3 बार दूध में घी दिया जाता है। हर संडे हरा चारा की बजाय सब्जी जैसे गाजर, पत्ता गोभी और पालक देते हैं। घर में फ्रूट पड़ा है तो उसे वो भी खिलाया जाता है। ज्यादातर उसे मिक्स अनाज दिया जाता है। चांद को 2 किलोमीटर की सैर भी कराई जाती है। Haryana News

15 लाख कीमत

मिली जानकारी के अनुसार, लोकेश ने दावा किया कि भिवानी मेले में चांद को खरीदने के लिए आंध्र प्रदेश की पार्टी आई थी। उन्होंने पहले 13 लाख और फिर 15 लाख रुपए में चांद को खरीदने में इंटरेस्ट दिखाया था। मगर, मैंने चांद को बेचने से इनकार कर दिया। Haryana News

20 बच्चों का पिता

जानकारी के मुताबिक, पशुपालक लोकेश ने यह भी बताया कि चांद 20 बच्चों का पिता बन चुका है। वे HLDB हिसार के साथ मिलकर नस्ल सुधार और थारपारकर नस्ल को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं। थारपारकर नस्ल खत्म होती जा रही है, जबकि ये एक शानदार नस्ल है।