Haryana: हरियाणा में इस गांव के सरपंच को किया गया सस्पेंड, जानें वजह
दरअसल, पवन कुमार ने साल 2022 में गांव खरींडवा से सरपंच पद का चुनाव लड़ा था। नामांकन के दौरान उसने CBSE की 10वीं कक्षा की मार्कशीट संलग्न की थी। करीब 300 वोटों से चुनाव जीतने के बाद वह गांव का सरपंच बना, लेकिन बाद में उसकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल खड़े हो गए।
प्रतिद्वंदी की शिकायत से खुला मामला
चुनाव में हारने वाले प्रत्याशी संजीव कुमार ने नवंबर 2022 में उपायुक्त कुरुक्षेत्र को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पवन कुमार ने 10वीं की फर्जी मार्कशीट बनवाकर चुनाव लड़ा, झूठा शपथपत्र दिया और तथ्यों को छिपाया। डीसी स्तर पर कराई गई जांच में पवन कुमार अपनी मार्कशीट को असली साबित नहीं कर पाया।
इसके बाद 27 दिसंबर 2024 को तत्कालीन डीसी ने उसे सरपंच पद से हटाने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि, पवन कुमार ने कोर्ट से स्टे ले लिया था, जिससे मामला लंबा खिंच गया।
पुलिस केस और गिरफ्तारी
संजीव कुमार ने 30 दिसंबर 2024 को पुलिस में भी शिकायत दी, जिसमें आरोपी पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकार को नुकसान पहुंचाने और गलत तरीके से सरपंच पद हासिल करने का आरोप लगाया गया। इस पर जनवरी 2025 में थाना शाहाबाद में IPC की धारा 420, 120-बी, 463, 465, 466, 467 और 471 के तहत केस दर्ज किया गया।
थाना शाहाबाद के SHO जगदीश टामक के अनुसार, आरोपी काफी समय तक फरार रहा। बाद में उसे गिरफ्तार कर कोर्ट के आदेश पर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया और फिर जेल भेज दिया गया।
कोर्ट दर कोर्ट हार
डीसी के आदेश के खिलाफ पवन कुमार ने पहले सेशन कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां CBSE सचिव की गवाही हुई। सचिव ने साफ तौर पर आरोपी की 10वीं की मार्कशीट को फर्जी बताया। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने भी उसकी अपील खारिज कर दी।
आखिर में पवन कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब अंबाला कमिश्नर कोर्ट ने उसे औपचारिक रूप से सस्पेंड कर दिया है।