Haryana News: हरियाणा में कर्ज को लेकर सीएम ने दिया बयान, विपक्ष के आंकड़ों को बताया गलत, जानिये क्या है स्थिति ?
प्रदेश की आर्थिक स्थिति का आकलन केवल भावनात्मक टिप्पणियों से नहीं, बल्कि ठोस तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए। हरियाणा की वित्तीय स्थिति को यदि पड़ोसी राज्य पंजाब के साथ तुलनात्मक रूप से देखा जाए, तो यह साफ दिखाई देता है कि हरियाणा आज भी आर्थिक प्रबंधन और विकास के मामले में कहीं अधिक संतुलित और मजबूत स्थिति में है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में बजट पर चर्चा के उपरांत जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004-05 में जब हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार थीं, उस समय हरियाणा का कुल बजट 15 हजार 526 करोड़ रुपये था। जबकि, पंजाब का बजट 25 हजार 627 करोड़ रुपये था अर्थात उस समय पंजाब का बजट हरियाणा की तुलना में अधिक था।
यदि उस समय के सरकारी ऋण की बात करें तो हरियाणा का कुल ऋण 17 हजार 347 करोड़ रुपये था, जो बजट का लगभग 112 प्रतिशत था। जबकि, पंजाब का कुल ऋण 37 हजार 796 करोड़ रुपये था, जो उनके बजट का लगभग 147 प्रतिशत था।
इसका अर्थ यह है कि उस समय भी पंजाब की वित्तीय स्थिति हरियाणा की तुलना में अधिक दबाव में थी। वर्ष 2005-06 और 2006-07 में भी यही स्थिति बनी रही, जब हरियाणा में कांग्रेस सरकार का बजट पंजाब की कांग्रेस सरकार से कम था परंतु पंजाब के बजट का ऋण प्रतिशत हरियाणा से ज्यादा था।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यदि हम हाल के वर्षों की स्थिति देखें तो वर्ष 2021-22 में जब पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, उस समय हरियाणा का बजट 1 लाख 35 हजार 910 करोड़ रुपये था और कुल ऋण बजट का लगभग 167 प्रतिशत था।
वहीं, पंजाब का बजट हरियाणा से कम होकर 1 लाख 25 हजार 501 करोड़ रुपये था, लेकिन उसका कुल ऋण बजट का लगभग 186 प्रतिशत था अर्थात उस समय भी पंजाब पर कर्ज का बोझ हरियाणा की तुलना में अधिक था जबकि हरियाणा का बजट पंजाब से ज्यादा हो गया था।
उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान स्थिति देखें तो यह अंतर और स्पष्ट दिखाई देता है। वर्ष 2026-27 के बजट में हरियाणा का कुल बजट 2 लाख 23 हजार 658 करोड़ रुपये है और कुल ऋण बजट का लगभग 175 प्रतिशत है। वहीं, दूसरी ओर पंजाब का कुल बजट केवल 1 लाख 80 हजार 437 करोड़ रुपये है। लेकिन, उसका कुल ऋण उसके बजट का लगभग 248 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास की गति को भी तेज किया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और कृषि जैसे सभी क्षेत्रों में लगातार निवेश किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम प्रदेश की तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था में दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने हरियाणा प्रदेश पर भी कर्ज के बारे में अलग—अलग आंकड़े देकर सदन और प्रदेश की जनता को गुमराह किया है। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 का लोन 96 हजार 875 करोड़ (70,925+25,950), जो 2014-15 की जी.एस.डी.पी. 4 लाख 37 हजार 145 करोड रुपये का 22.16 प्रतिशत बनता है। उस समय वित्त आयोग की ऋण लेने की सीमा थी 22.9 प्रतिशत।
इंडस्ट्रियल सेक्टर का कर्ज
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्री बतरा ने उद्योगों के बारे में सवाल उठाया है कि हरियाणा में बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज हैं जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि। इन उद्योगों पर भी लगभग 1 लाख 85 हजार 767 करोड़ रुपये का कर्ज है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के सदस्य बताएं कि क्या बड़े-बड़े उद्योगों का कर्ज सरकार ने चुकाना होता है? क्या इनके पास किसी बैंक अथवा वाणिज्यिक संस्थान का अनुरोध आया है कि उनके द्वारा किसी उद्योग को दिया गया कर्ज सरकार से दिलवाया जाए ? अब की बात तो छोड़ो, ये अपने कार्यकाल का भी कोई उदाहरण बताएं, जिसमें उद्योगों का कर्ज सरकार द्वारा चुकाये जाने की बात हुई हो।