Haryana: हिसार में HERC की जनसुनवाई: आत्म-जवाबदेही, प्रतिस्पर्धा और सौर ऊर्जा पर जोर
अध्यक्ष ने कहा कि हरियाणा में बिजली वितरण का दायित्व उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के पास है। दोनों निगमों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होना जरूरी है, क्योंकि इससे सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रतिस्पर्धात्मक भावना से शिकायतों में स्वतः कमी आएगी और उपभोक्ता संतुष्टि बढ़ेगी।
यह विचार उन्होंने बुधवार को गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हिसार में डीएचबीवीएन द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) याचिका पर आयोजित जनसुनवाई की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर आयोग के सदस्य श्री मुकेश गर्ग, श्री शिव कुमार, सचिव श्री प्रशांत देष्टा, विद्युत लोकपाल आर के खन्ना, डीएचबीवीएन के निदेशक (ऑपरेशन) विपिन गुप्ता, मुख्य अभियंता अनिल शर्मा, आयोग के उप निदेशक (मीडिया) प्रदीप मलिक, डीएचबीवीएन के पीआरओ संजय चुघ तथा विभिन्न वर्गों के बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ता उपस्थित रहे।
अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 64(3) के अनुसार एआरआर आदेश जारी करने से पूर्व उपभोक्ताओं से सुझाव लेना अनिवार्य है। आयोग का मानना है कि उपभोक्ताओं की भागीदारी से ही पारदर्शिता और संतुलन सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि आयोग केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि फील्ड में जाकर उपभोक्ताओं की समस्याओं को समझ रहा है। उपभोक्ताओं से प्राप्त फीडबैक पर ही कई महत्वपूर्ण निर्णय निर्भर करते हैं।
उन्होंने धारा 65 का उल्लेख करते हुए बताया कि किसानों को दी जाने वाली बिजली सब्सिडी का प्रावधान स्पष्ट है और राज्य सरकार द्वारा इसका भुगतान समय पर किया जा रहा है। आयोग का प्रयास है कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध बिजली मिले, साथ ही वितरण कंपनियों को वित्तीय हानि न पहुंचे। इसी संतुलन को साधना नियामक की प्रमुख जिम्मेदारी है।
जनसुनवाई के दौरान सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और ग्रिड स्थिरता के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अध्यक्ष ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहा है और गैर-जीवाश्म स्रोतों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब ग्रिड में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो हाइड्रो पावर के माध्यम से उसे पुनः प्रारंभ किया जाता है। इसलिए विभिन्न ऊर्जा स्रोतों का समन्वय और संतुलित विकास आवश्यक है।
आयोग के सदस्य श्री मुकेश गर्ग ने उपभोक्ताओं की टिप्पणियों पर डीएचबीवीएन अधिकारियों से सीधे प्रश्न-उत्तर किए। वहीं सदस्य श्री शिव कुमार ने कहा कि लिखित सुझाव और टिप्पणियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे आयोग को अंतिम आदेश पारित करने में सुविधा होती है।
डीएचबीवीएन की ओर से दिए गए प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि निगम के पास 3 लाख 72 हजार वितरण ट्रांसफार्मर हैं तथा वर्तमान में एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल हानि 11.67 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक सौर संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसान अपनी आवश्यकता अनुसार बिजली का उपयोग कर शेष बिजली निगम को बेच सकते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भविष्य में जनसुनवाइयां सीधे जनता के बीच आयोजित की जाएंगी और घरेलू उपभोक्ताओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। आयोग ने पुनः दोहराया कि पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण ही प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे।
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री नन्द लाल शर्मा, सदस्य श्री मुकेश गर्ग एवं सदस्य श्री शिव कुमार हिसार में एआरआर की सार्वजनिक सुनवाई की अध्यक्षता करते हुए।