घटिया निर्माण पर हरियाणा सरकार सख्त, 6 इंजीनियर को किया निलंबित
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता संबंधी खामियों को गंभीरता से लेते हुए छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) द्वारा विभिन्न इंजीनियरिंग विभागों के तकनीकी ऑडिट में पाई गई कमियों के बाद की गई है। निलंबित अधिकारियों में विकास एवं पंचायत विभाग के करनाल में तैनात कार्यकारी अभियंता (सिविल) नारायण दत्त, पूर्व में करनाल और वर्तमान में कैथल में तैनात कार्यकारी अभियंता (सिविल) परमिंदर सिंह, जूनियर इंजीनियर रमेश चंद सहित लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़क) के तीन अन्य अधिकारी शामिल हैं।
चंडीगढ़ में आयोजित क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, जवाबदेही और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि QAA की टिप्पणियों और सुझावों को गंभीरता से लेते हुए तुरंत आवश्यक कार्रवाई की जाए। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, QAA के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा, विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार कई अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। वहीं हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के एक मामले में घटिया निर्माण कार्य पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संदेश सभी विभागों, अधिकारियों, सलाहकारों, ठेकेदारों और परियोजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों तक स्पष्ट रूप से पहुंचना चाहिए कि सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी की टीमों ने राज्यभर में भवन, सड़क, सिंचाई, जनस्वास्थ्य और बिजली क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं का तकनीकी ऑडिट किया है।
ऑडिट के दौरान लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़क) की 18 परियोजनाएं, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की 5, सिंचाई विभाग की 4, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की 14, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम की 3, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की 3, हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन की 1, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड की 7, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की 4, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की 1, शहरी स्थानीय निकाय विभाग की 2 तथा विकास एवं पंचायत विभाग की 2 परियोजनाओं की जांच की गई। सरकार की इस कार्रवाई को सार्वजनिक परियोजनाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।