हरियाणा सरकार की नई पहल, जमीन रिकॉर्ड से जुड़े 5 लाख मामलों का निपटारा
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने जमीन और संपत्ति के रिकॉर्ड से जुड़ी व्यवस्था में बड़ा सुधार किया है। सरकार ने पिछले छह महीनों में जमीन के मालिकाना हक में बदलाव दर्ज करने से जुड़े लंबित मामलों की संख्या 90 प्रतिशत से अधिक कम कर दी है। साथ ही पूरे राज्य में ऐसी नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही मालिक का नाम सरकारी रिकॉर्ड में अपने आप अपडेट हो जाएगा।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को बताया कि इस पहल का उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुराने रिकॉर्ड को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का काम पूरा कर लिया है। इससे अब जिला और राज्य स्तर के अधिकारी जमीन से जुड़े मामलों की रीयल-टाइम निगरानी कर सकेंगे और किसी भी देरी पर तुरंत कार्रवाई कर पाएंगे।
5 लाख से घटकर 50 हजार रह गए मामले
सरकार के विशेष अभियान और रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के बाद जमीन के मालिकाना हक में बदलाव दर्ज करने से जुड़े लंबित मामलों की संख्या करीब 5 लाख से घटकर लगभग 50 हजार रह गई है। बचे हुए मामलों को निपटाने के लिए सरकार ने 10 दिन का विशेष अभियान शुरू किया है। तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए।
रजिस्ट्री के साथ ही अपडेट होगा रिकॉर्ड
नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में कहीं भी किसी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही सरकारी रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम अपने आप दर्ज हो जाएगा। इसके लिए लोगों को अलग से आवेदन नहीं करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इससे लाखों लोगों का समय बचेगा और उन्हें राजस्व कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही रिकॉर्ड समय पर अपडेट होने से जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद भी कम होंगे।
पारदर्शिता बढ़ेगी, लोगों को होगी सुविधा
सुमिता मिश्रा ने कहा कि नई व्यवस्था से अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और लोगों को सेवाएं तेजी से मिल सकेंगी। सरकार का लक्ष्य पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और नागरिकों की सुविधा पर आधारित राजस्व व्यवस्था विकसित करना है, ताकि लोगों को जमीन और संपत्ति से जुड़े काम बिना किसी परेशानी के समय पर मिल सकें।