हरियाणा सरकार की महंगी दवाओं पर सख्ती; अब देना होगा हिसाब, CM ने दिए निर्देश
आदेश के मुताबिक, पहले सभी विभाग अपनी दवाओं की मांग सीधे खरीद विभाग को भेज देते थे, लेकिन अब इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। निदेशक कार्यालय में हुई बैठक में तय किया गया कि महंगी दवाओं की मांग भेजने से पहले विभागाध्यक्षों को विस्तार से बताना होगा कि दवा क्यों जरूरी है और उसका मरीजों पर क्या असर होगा। Haryana News
इन सवालों के जवाब
मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय भंडार ने विभागों से कहा कि महंगी दवाओं की मांग पर आगे बढ़ने से पहले कुछ अहम बातें स्पष्ट की जाए, जैसे, क्या उस दवा का कोई सस्ता विकल्प उपलब्ध है। कितने मरीजों को इससे फायदा होगा। इलाज की सफलता दर क्या है। दवा किसी रिसर्च या प्रोजेक्ट के लिए तो नहीं ली जा रही। Haryana News
जानकारी के मुताबिक, प्रशासन ने एक हजार रुपए से लेकर 76 हजार रुपए प्रति Unit तक की कीमत वाली दवाओं की सूची भी विभागों को भेजी है और जल्द जवाब मांगा है।
दवा मिलने पर रहेगा फोकस
मिली जानकारी के अनुसार, PGIMS प्रबंधन का कहना है कि सीमित बजट के कारण अब दवाओं की खरीद प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी, ताकि जरूरी दवाओं की कमी न हो और मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। इस फैसले से अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी और अस्पताल की दवा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। Haryana News
CM दे चुके निर्देश
जानकारी के मुताबिक, हरियाणा के CM सैनी ने दो हफ्ते पहले हुई रिव्यू मीटिंग में निर्देश दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में दवा का रिकॉर्ड रियल टाइम सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर होगा। किस अस्पताल में कौन सी दवा उपलब्ध हैं, उस बारे में डॉक्टर को बताया जाएगा। Haryana News
ताकि बाहर की दवा लिखने की गुजाइंश न बचे। अगर फिर भी किसी डॉक्टर द्वारा बाहर से मिलने वाली दवा किसी मरीज की OPD स्लीप पर लिखी जाती है, तो डॉक्टर उस बारे में अस्पताल में दवा उपलब्ध न होने की बात लिखेंगे।