गैर-सरकारी नियुक्तियों पर हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, जारी किए एक समान नियम
यह आदेश मुख्य सचिव कार्यालय के अधीन राजनीतिक एवं संसदीय कार्य विभाग की ओर से जारी किया गया है। सरकार का कहना है कि अब तक इन नियुक्तियों को लेकर अलग-अलग समय पर कई आदेश और संशोधन जारी किए गए थे, जिससे विभागों में नियमों की व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा होती थी। कई बार अलग-अलग संस्थाओं में अलग प्रक्रिया अपनाई जाती थी, जिसके कारण प्रशासनिक स्तर पर असमानता और स्पष्टता की कमी देखने को मिलती थी।
सभी विभागों और सरकारी निकायों में एक समान व्यवस्था लागू करना
नई नीति का मुख्य उद्देश्य सभी विभागों और सरकारी निकायों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना है, ताकि नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और प्रशासनिक कार्यों में एकरूपता आए। इसके तहत पहले जारी किए गए सभी महत्वपूर्ण प्रावधानों और संशोधनों को एक ही फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है। इससे अब विभागों को अलग-अलग आदेश देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और सभी नियुक्तियां तय नियमों के आधार पर की जा सकेंगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह नीति गैर-सरकारी व्यक्तियों की नियुक्ति, कार्यकाल, सुविधाएं, अधिकार, जिम्मेदारियां और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करेगी। इससे विभागों को निर्णय लेने में आसानी होगी और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद या भ्रम की संभावना भी कम होगी। अधिकारियों का कहना है कि कई बार विभिन्न बोर्डों और समितियों में नियुक्त व्यक्तियों के अधिकारों, सुविधाओं और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में अलग-अलग विभाग अलग नियमों का हवाला देते थे। अब एकीकृत नीति लागू होने के बाद सभी निकायों में समान नियम लागू होंगे।
दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश
सरकार का मानना है कि इस कदम से नियुक्ति प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी। साथ ही प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी संबंधित संस्थाओं को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकेंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी विभागों और संबंधित निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन मानक नियमों का पालन सुनिश्चित करें और नियुक्तियों से जुड़े मामलों में इन्हीं दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई करें।