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Haryana: हरियाणा में अब लक्षण से पहले TB को पकड़ेगी AI, जानें कैसे 

 
Haryana: हरियाणा सरकार ने टीबी नियंत्रण के लिए पारंपरिक जांच मॉडल से आगे बढ़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्क्रीनिंग को अपनाया है। इस नई रणनीति का मकसद मरीजों में लक्षण दिखने से पहले ही बीमारी का पता लगाना और समय रहते इलाज शुरू करना है।

राज्य सरकार ने एआई सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे डिवाइस के जरिए सक्रिय स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है जिससे बिना लक्षण वाले लोगों में भी फेफड़ों की असमान्यताओं का पता चल सकेगा। 

इस पहल के तहत 2111 हाई रिस्क वाले गांवों और शहरी वार्डों को चिन्हित कर वहां इन डिवाइसों को लगाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह कदम पारंपरिक निष्क्रिय जांच प्रणाली से हटकर एक सक्रिय और समुदाय आधारित मॉडल की ओर बदलाव को दर्शाता है। अब मरीजों के अस्पताल आने का इंतजार करने के बजाय स्वास्थ्य टीमें खुद समुदाय तक पहुंचकर जांच कर रही हैं।

इस अभियान को मजबूत करने के लिए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) फाउंडेशन के साथ 20.5 करोड़ रुपये की साझेदारी भी की गई है। इसके तहत 150 ट्रूनेट कूवात्रो मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी जिससे जांच प्रक्रिया तेज होगी और सैंपल से लेकर पुष्टि तक का समय कम हो सकेगा। दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए 65 मोबाइल मेडिकल यूनिट और निक्षय वाहन भी तैनात किए गए हैं जो मौके पर ही जांच और परामर्श सुविधा दे रहे हैं। साथ ही पंचकूला स्थित स्टेट टीबी सेल में टेलीमेडिसिन सेंटर शुरू किया गया है जिससे मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेषज्ञ सलाह मिल सके।


इस साल 15 लाख थूक सैंपलों की जांच का लक्ष्य


सरकार का लक्ष्य इस साल 15 लाख थूक सैंपलों की जांच करना है जो पिछले साल के मुकाबले अधिक है। डिजिटल निगरानी को मजबूत करने के लिए राज्य ने एक ऑनलाइन पोर्टल और माई भारत प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है जहां आम लोग टीबी कार्यक्रम की प्रगति देख सकते हैं। इसके अलावा टीबी से होने वाली मौतों का विश्लेषण करने के लिए डेथ ऑडिट बुकलेट जारी की गई है जिससे सिस्टम की कमजोरियों को पहचानने में मदद मिलेगी। सरकार ने सामाजिक पहलुओं पर भी ध्यान देते हुए ठीक हो चुके मरीजों को रोजगार से जोड़ने के लिए सिलाई मशीनें और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र दिए हैं।