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 बिल्डर की चूक का खामियाजा नहीं भुगतेंगे फ्लैट मालिक, हाईकोर्ट ने बिजली कनेक्शन काटने पर लगाई रोक

 

चंडीगढ़, 26 जुलाई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मोहाली स्थित सुषमा ग्रांडे एनएक्सटी रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी की याचिका पर बड़ी राहत देते हुए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को निर्देश दिया है कि बिल्डर द्वारा बिजली बकाया जमा न कराने के कारण सोसायटी के निवासियों का बिजली कनेक्शन फिलहाल नहीं काटा जाएगा।
याचिकाकर्ता सोसायटी की ओर से अदालत को बताया गया कि सोसायटी का गठन परिसर में रहने वाले परिवारों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। परिसर की सामुदायिक सुविधाओं (लिफ्ट, कम्युनिटी सेंटर, स्ट्रीट लाइट, पानी की सप्लाई आदि) के लिए लगा बिजली कनेक्शन बिल्डर के नाम पर दर्ज है तथा बिल्डर द्वारा उक्त कनेक्शन का बकाया बिल जमा नहीं कराया गया और परियोजना भी अधूरी छोड़ दी गई। सोसायटी ने पीएसपीसीएल से सामुदायिक सुविधाओं हेतु सोसायटी के नाम पर एक नया व स्वतंत्र बिजली कनेक्शन जारी करने का अनुरोध किया, परंतु पीएसपीसीएल ने यह कहते हुए अनुरोध ठुकरा दिया कि जब तक बिल्डर के नाम पर दर्ज उक्त कनेक्शन का बकाया सोसायटी द्वारा जमा नहीं कराया जाता, न तो सोसायटी के नाम पर नया कनेक्शन जारी किया जाएगा और न ही मौजूदा कनेक्शन जारी रखा जाएगा — भुगतान न होने पर मौजूदा कनेक्शन काट दिया जाएगा। 
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि परिसर में 100 से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं। बिजली कनेक्शन काटे जाने की स्थिति में लिफ्ट, स्ट्रीट लाइट सहित अन्य सामुदायिक सुविधाओं के साथ-साथ पानी की सप्लाई भी ठप्प हो जाती, क्योंकि परिसर में पानी की आपूर्ति भी बिजली से चलने वाले पंपों पर ही निर्भर है। इससे बुजुर्गों, बच्चों सहित सैकड़ों निवासियों को भारी परेशानी और संकट का सामना करना पड़ता। बिल्डर की लापरवाही और वित्तीय चूक का दंड निर्दोष निवासियों को नहीं दिया जा सकता। इन्हीं परिस्थितियों में सोसायटी ने निवासियों के कल्याण तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मूल अधिकारों की सुरक्षा हेतु माननीय उच्च न्यायालय का रुख किया।
23 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए माननीय हाईकोर्ट ने पीएसपीसीएल को निर्देश दिया कि सोसायटी के माध्यम से प्रतिनिधित्व किए जा रहे निवासियों का बिजली कनेक्शन, बिल्डर के बकाया भुगतान न किए जाने के आधार पर, फिलहाल नहीं काटा जाएगा। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार, पीएसपीसीएल तथा ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) की ओर से अधिवक्ताओं ने अदालत में पेश होकर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना-अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
गौरतलब है कि परिसर के निवासियों के अपने-अपने फ्लैटों के व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन नियमित रूप से चालू हैं और उनका बिल भी नियमित रूप से भरा जा रहा है — विवाद केवल सामुदायिक सुविधाओं के साझा कनेक्शन को लेकर है, जिसमें निवासियों की कोई चूक नहीं है। सोसायटी ने पीएसपीसीएल को इस संबंध में एक अभ्यावेदन (रिप्रेजेंटेशन) भी दिया था, जिसे पीएसपीसीएल ने अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद अंततः सोसायटी को उच्च न्यायालय में याचिका दायर करनी पड़ी।
मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को निर्धारित की गई है।
अदालत के इस अंतरिम आदेश से फिलहाल सैकड़ों परिवारों को राहत मिली है, जबकि मामले में अंतिम निर्णय संबंधित पक्षों के जवाब दाखिल होने और आगामी सुनवाई के बाद लिया जाएगा।