हरियाणा सूचना आयोग में हुई नियुक्तियों संबंधी संपूर्ण आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की उठी मांग
चंडीगढ़, 13 जुलाई। हरियाणा राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (SCIC) और राज्य सूचना आयुक्तों (SICs) की नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने सोमवार 13 जुलाई को प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, मुख्य सचिव, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, सभी राज्य सूचना आयुक्तों, लोकायुक्त, एडवोकेट जनरल, विधि परामर्शदाता ( एल.आर) आदि को एक विस्तृत जन-प्रतिवेदन (Public Representation) भेजकर वर्ष 2025 की पूरी चयन प्रक्रिया के अभिलेख तत्काल सार्वजनिक करने की मांग की है।
हेमंत ने कहा कि मार्च 2025 में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के एक तथा राज्य सूचना आयुक्तों के सात पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसके बाद 23 मई 2025 को सरकार ने एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और पांच राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के दो अलग अलग आदेश जारी किए जिसमें पहले में प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद को राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और दूसरे में अमरजीत सिंह, कर्मवीर सैनी, नीता खेड़ा, प्रियंका धोपड़ा और संजय मदान को राज्य सूचना आयुक्त के तौर पर नियुक्त किया गया.
हालांकि, 26 मई 2025 को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में तत्कालीन राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय द्वारा राज्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त प्रियंका धोपड़ा को शपथ नहीं दिलाई गई । आश्चर्यजनक रूप से एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनका नियुक्ति आदेश आज भी न तो वापस लिया गया है और न ही उसमें कोई संशोधन किया गया है, जिससे उनकी नियुक्ति की वैधानिक स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है.
ज्ञापन में आगे उल्लेख किया गया है कि उसके 11 महीने बाद 20 अप्रैल 2026 को अजय कुमार सूरा को राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया और उन्होंने 24 अप्रैल 2026 को शपथ ग्रहण की। इस घटनाक्रम ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या सूरा का नाम वर्ष 2025 की मूल चयन प्रक्रिया में ही चयनित था या बाद में किसी नई प्रक्रिया अथवा समिति की बैठक के आधार पर उनकी नियुक्ति की गई।
हेमंत ने कहा कि यद्यपि लगभग 350 आवेदनकर्ताओं के
नाम और संक्षिप्त विवरण संबंधी सूची प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक कर दी है, लेकिन चयन प्रक्रिया से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज आज तक सार्वजनिक नहीं किए गए। इनमें सर्च कमेटी के गठन के आदेश, वैधानिक चयन समिति के गठन के आदेश तथा दोनों समितियों की बैठकों की कार्यवाही (Minutes) शामिल हैं।
हेमंत ने अपने ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2019 के ऐतिहासिक निर्णय अंजलि भारद्वाज बनाम भारत सरकार का हवाला देते हुए लिखा कि उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी होनी चाहिए तथा उससे संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि नागरिक चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैधता का परीक्षण कर सकें।
ज्ञापन में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(2) का भी हवाला देते हुए लिखा गया है कि प्रत्येक लोक प्राधिकरण पर ऐसी सूचनाओं का स्वप्रेरणा से प्रकटीकरण (Proactive Disclosure) करना कानूनी दायित्व है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग आरटीआई आवेदन दाखिल करने की आवश्यकता ही न पड़े।
हेमंत ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2022 की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान हरियाणा सरकार ने सर्च कमेटी और चयन समिति के गठन संबंधी आदेश तथा उनकी बैठकों की कार्यवाही सार्वजनिक की थी। इसलिए वर्ष 2025 की चयन प्रक्रिया में भी वही पारदर्शिता अपनाई जानी चाहिए।
उन्होंने हरियाणा सरकार से मांग की है कि 2025 की चयन प्रक्रिया से संबंधित सभी आदेश और कार्यवाही तत्काल सार्वजनिक की जाए, अजय कुमार सूरा की नियुक्ति के आधार का आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया जाए तथा प्रियंका धोपड़ा की नियुक्ति की वर्तमान वैधानिक स्थिति पर भी स्पष्ट सरकारी रुख सामने लाया जाए।
हेमंत ने कहा कि उनका यह ज्ञापन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के शासन को मजबूत करने के उद्देश्य से जनहित में प्रस्तुत किया गया है।