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IAS कैडर पोस्ट पर गैर-कैडर/पुनर्नियुक्त अधिकारी को माह से अधिक रखने के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी – एडवोकेट

 

चंडीगढ़, 3 जुलाई। हरियाणा लोक सेवा आयोग (एच.पी.एस.सी.) के सचिव पद पर तैनात सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी मुकेश आहूजा की तीन माह की पुनर्नियुक्ति 30 जून 2026 को पूरी  होने के बाद अब इस संवैधानिक आयोग के महत्वपूर्ण और संवेदनशील पद पर तैनाती  को लेकर प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या अब सरकार इस आई.ए.एस. कैडर पद पर किसी कार्यरत आई.ए.एस. अधिकारी की नियुक्ति करेगी अथवा मुकेश आहूजा को आगे भी बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार से स्वीकृति लेगी ?

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार  हेमंत कुमार ने बताया कि गत कई वर्षो से एच.पी.एस.सी. सचिव का पद विधिवत अधिसूचित आई.ए.एस. कैडर पोस्ट है. इस पद  पर सेवानिवृत्त अधिकारी को राज्य सरकार अपने स्तर पर अधिकतम तीन माह तक ही पुनर्नियुक्ति के आधार पर रख सकती है। यदि इससे अधिक अवधि तक नियुक्ति जारी रखनी हो तो केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।

11 जून के गजट ने बढ़ाई अहमियत

हेमंत ने बताया कि गत माह  11 जून 2026 को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डी.ओ.पी.टी.) द्वारा जारी आई.ए.एस. कैडर पुनर्निर्धारण संबंधी गजट अधिसूचना में एच.पी.एस.सी. सचिव के पद को स्पष्ट रूप से आई.ए.एस. कैडर पोस्ट घोषित किया गया है। ऐसे में इस पद पर नियुक्ति को लेकर आई.ए.एस. कैडर नियमों का पालन करना और  भी आवश्यक  हो जाता है।

तीन दिन बाद भी नहीं हुआ नया आदेश

30 जून को पुनर्नियुक्ति अवधि समाप्त होने के बाद भी सरकार की ओर से न तो किसी कार्यरत आई.ए.एस. अधिकारी को एच.पी.एस.सी. सचिव नियुक्त करने का आदेश जारी हुआ है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि मुकेश आहूजा को आगे भी पद पर बनाए रखा गया है या नहीं। इससे प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल: पुनर्नियुक्ति आदेश आखिर सार्वजनिक क्यों नहीं?

मामले का सबसे चर्चित पहलू यह है कि मुकेश आहूजा की तीन माह की पुनर्नियुक्ति का आदेश आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया।

आमतौर पर आई.ए.एस. और एच.सी.एस. अधिकारियों के तबादलेनियुक्ति एवं सेवा संबंधी आदेश मुख्य सचिव की आधिकारिक वेबसाइट पर उसी दिन या एक-दो दिन के भीतर अपलोड कर दिए जाते हैंलेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।

RTI में केंद्र सरकार ने कहा— हमारे पास आदेश की प्रति नहीं

एडवोकेट हेमंत ने अप्रैल 2026 को ऑनलाइन आर.टी.आई. के माध्यम से कैबिनेट सचिवालय से मुकेश आहूजा की पुनर्नियुक्ति संबंधी जानकारी मांगी थी।

आवेदन डी.ओ.पी.टी. को भेजा गयाजहां से उत्तर मिला कि आई.ए.एस. (कैडर) नियमावली, 1954 का नियम-केवल गैर-कैडर अधिकारियों की अस्थायी नियुक्ति से संबंधित हैसेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति से नहीं।

इसके साथ ही विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्नियुक्ति संबंधी जानकारी संबंधित राज्य सरकार से प्राप्त की जा सकती है।

हेमंत की प्रथम अपील भी इसी आधार पर निस्तारित कर दी गई। इतना ही नहींएक अन्य आर.टी.आई. के उत्तर में केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि उसके अभिलेखों में मुकेश आहूजा की पुनर्नियुक्ति संबंधी आदेश की प्रति उपलब्ध ही नहीं है।

पहले कृषि विपणन बोर्ड से हटेसचिव बने रहे

मुकेश आहूजा मूल रूप से 1997 बैच के एच.सी.एस. अधिकारी रहे हैं। वर्ष 2019 में उन्हें आई.ए.एस. में पदोन्नत कर 2009 बैच की वरिष्ठता प्रदान की गई थी।

31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें अप्रैल से 30 जून तक तीन माह की पुनर्नियुक्ति मिली। हालांकि 26 मई को सरकार ने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक पद पर उनकी जगह 2012 बैच के आई.ए.एस. अधिकारी धर्मेंद्र सिंह को नियुक्त कर दियाजबकि वे एच.पी.एस.सी. सचिव पद पर बने रहे।

हेमंत की मांग— आदेश सार्वजनिक करे सरकार

एडवोकेट हेमंत ने राज्यपालमुख्यमंत्रीमुख्य सचिव और हरियाणा सरकार के कार्मिक विभाग से मांग की है कि मुकेश आहूजा की पुनर्नियुक्ति संबंधी आदेश तत्काल सार्वजनिक किया जाएताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्हें किस कानूनी प्रावधान के तहत पुनर्नियुक्त किया गया था.

उन्होंने सूचना के अधिकार कानून के स्वप्रेरित प्रकटीकरण संबंधी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक सूचनाएं स्वतः सार्वजनिक की जानी चाहिए।

अब आयोग का सदस्य बनाए जाने की चर्चा

प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि सरकार मुकेश आहूजा को हरियाणा लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त कर सकती है।

हेमंत कुमार का कहना है कि यदि सरकार ऐसा निर्णय लेती है तो उसमें कोई वैधानिक बाधा नहीं हैलेकिन ऐसी स्थिति में उनका कार्यकाल केवल मार्च 2028 तक रहेगाक्योंकि आयोग के सदस्य के रूप में वे 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक ही पद पर रह सकेंगे।