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AAP नेता दीपक सिंगला को बड़ा झटका, PMLA कोर्ट ने खारिज की जमानत 

पंचकूला:धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली पंचकूला की विशेष अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका खारिज कर दी है। दीपक सिंगला पर करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संलिप्त होने के आरोप हैं।  AAP के गोवा प्रभारी और 2020 तथा 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में विश्वास नगर सीट से उम्मीदवार रह चुके दीपक सिंगला को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 मई को गिरफ्तार किया था।
 
पंचकूला: धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली पंचकूला की विशेष अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका खारिज कर दी है। दीपक सिंगला पर करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संलिप्त होने के आरोप हैं।  AAP के गोवा प्रभारी और 2020 तथा 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में विश्वास नगर सीट से उम्मीदवार रह चुके दीपक सिंगला को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 मई को गिरफ्तार किया था।

155 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक फ्रॉड का मामला

मामले की शुरुआत 8 मई 2018 को हुई, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने Oriental Bank of Commerce की शिकायत पर बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।CBI के अनुसार, महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड ने सिंगापुर में अपनी एक सहायक कंपनी बनाई थी, जो वहां के बैंकों से क्रेडिट सुविधाएं ले रही थी। इन सुविधाओं के लिए भारत के बैंकों के कंसोर्टियम द्वारा स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए गए थे। जांच में आरोप लगा कि कंपनी ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट (FLC) की राशि में धोखाधड़ी से बढ़ोतरी की, जिससे OBC को लगभग 155.21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बाद में जांच में कंपनी पर बकाया मूल राशि 239.46 करोड़ रुपये पाई गई। इस मामले में 10 अगस्त 2020 को चार्जशीट दाखिल की गई थी।

ED ने लगाए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप

ED ने 5 सितंबर 2019 को इस मामले में ECIR दर्ज की थी। एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने OBC के एक वरिष्ठ प्रबंधक के साथ मिलकर FLC की राशि को 21.47 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 173.03 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी बिल ऑफ एंट्री, बिल ऑफ लाडिंग और अन्य आयात दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धन की हेराफेरी की गई। ED के मुताबिक दीपक सिंगला सह-आरोपी रमन सिंगला के भाई हैं, जो कथित शेल कंपनी अमेजन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। वहीं मुख्य आरोपी अशोक कुमार मित्तल उनके चाचा हैं और महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रहे हैं। एजेंसी का दावा है कि दीपक सिंगला ने FLC में कथित फर्जी बढ़ोतरी, अपराध से अर्जित धन के सृजन और विभिन्न कंपनियों के माध्यम से उसके मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाई।

2.82 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का आरोप

ED ने अदालत को बताया कि दीपक सिंगला और सह-आरोपी अशोक मित्तल से जुड़े खातों के माध्यम से 2.82 करोड़ रुपये का चक्रीय (Circular) लेनदेन किया गया, जिसका उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत और लाभार्थी को छिपाना था। 18 मई को दीपक सिंगला के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान ED ने 25 लाख रुपये नकद और 6,000 सिंगापुर डॉलर (SGD) भी बरामद किए थे।

143 करोड़ रुपये का अब तक नहीं चला पता

जमानत का विरोध करते हुए ED के विशेष लोक अभियोजक Harneet Singh Oberoi ने अदालत को बताया कि कथित तौर पर हेराफेरी की गई करीब 143 करोड़ रुपये की राशि का अब तक पता नहीं चल पाया है। ऐसे में मामले की आगे की जांच बेहद जरूरी है। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पूछे गए 165 सवालों में से दीपक सिंगला ने 150 सवालों पर टालमटोल भरे जवाब दिए। इसके अलावा उन्होंने जब्त किए गए मोबाइल फोन का पासवर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया।

करोड़ों के लेनदेन का नहीं दे सके जवाब

ED के अनुसार दीपक सिंगला के खाते में 60 लाख रुपये रागनी श्याम नामक व्यक्ति से आए थे, जिन्हें बाद में ट्रैफिक मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को भेज दिया गया। इसी तरह उनकी पत्नी द्वारा संचालित कंपनी कायो इंटरनेशनल से उनके खाते में 1.05 करोड़ रुपये आए, जिन्हें बाद में जय दुर्गा एंटरप्राइजेज को ट्रांसफर किया गया। इसके अलावा जय दुर्गा एंटरप्राइजेज से उनके खाते में आए 1.41 करोड़ रुपये के बारे में भी वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

अदालत ने क्यों खारिज की जमानत?

दीपक सिंगला के वकील ने दलील दी कि मामले की जांच करीब आठ साल से चल रही है और जिन दस्तावेजों पर ED भरोसा कर रही है, वे लंबे समय से एजेंसी के पास मौजूद हैं। ऐसे में इतनी देरी से गिरफ्तारी उचित नहीं है। हालांकि 6 जून को विशेष अदालत ने कहा कि ED ने अपनी अभियोजन शिकायत और पूरक शिकायत में आगे की जांच जारी रखने की बात कही है। इसलिए केवल जांच की अवधि के आधार पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने मामले की गंभीरता, जांच की स्थिति और ED के तर्कों को ध्यान में रखते हुए दीपक सिंगला की जमानत याचिका खारिज कर दी।