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हरियाणा में छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने की बड़ी पहल, ड्रोन टेक्नोलॉजी से लेकर रॉकेट विज्ञान तक मिलेगा प्रशिक्षण

 

चंडीगढ़, 11 मई-हरियाणा सरकार ने प्रदेश के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान, उभरती तकनीकों और नवाचार आधारित शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार ने विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों का पंजीकरण “इंडिया स्पेस लैब-समर इंटर्नशिप एवं टेक्निकल ट्रेनिंग प्रोग्राम-2026” में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों को जारी पत्र में कहा गया है कि नई दिल्ली स्थित इंडिया स्पेस लैब द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को अंतरिक्ष विज्ञान एवं अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि इस कार्यक्रम का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए तथा इसकी जानकारी विभागीय वेबसाइटों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य आधिकारिक माध्यमों पर भी उपलब्ध करवाई जाए, ताकि अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।

इंडिया स्पेस लैब द्वारा जारी कार्यक्रम विवरण के अनुसार समर इंटर्नशिप एवं तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को एडवांस ड्रोन टेक्नोलॉजी, कैनसैट एवं क्यूबसैट (स्टूडेंट सैटेलाइट), रॉकेट्री ट्रेनिंग, रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस, डिजास्टर मैनेजमेंट और अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित अन्य आधुनिक विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

यह प्रशिक्षण पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा लाइव सेशन लिए जाएंगे। प्रतिभागियों को विभिन्न अंतरिक्ष परियोजनाओं, तकनीकी प्रयोगों, उपग्रह प्रणालियों तथा आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी। कार्यक्रम के सफल समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

कार्यक्रम में स्नातक, स्नातकोत्तर विद्यार्थी तथा शोधार्थी भाग ले सकेंगे। इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं को केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि उन्हें भविष्य की प्रौद्योगिकियों और वैश्विक स्तर के वैज्ञानिक नवाचारों से सीधे जोड़ेंगे।

समर इंटर्नशिप कार्यक्रम को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के दूसरे बैच के लिए 10 जून तक आवेदन किए जा सकेंगे जबकि कक्षाएं 17 जून से 4 जुलाई तक संचालित होंगी। कार्यक्रम में कुल 2315 सीटें उपलब्ध हैं, जिनमें पहले बैच के लिए 1270 थीं जबकि दूसरे बैच के लिए 1045 सीटें निर्धारित की गई हैं। प्रतिभागियों के लिए 950 रुपये पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप के लिए अलग से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार का स्टाइपेंड प्रदान नहीं किया जाएगा।

इंडिया स्पेस लैब ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों तथा “विकसित भारत 2047” अभियान के अंतर्गत युवाओं को स्पेस टेक्नोलॉजी, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह समर इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया गया है, ताकि देश के विद्यार्थी वैश्विक स्तर की तकनीकी समझ और कौशल विकसित कर सकें।

पत्र में यह भी कहा गया है कि “इंडिया स्पेस वीक” और “नेशनल स्पेस डे” जैसे कार्यक्रमों के बाद युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति तेजी से बढ़ती रुचि को देखते हुए इस प्रकार की पहलों को और अधिक विस्तार दिया जा रहा है।

ड्रोन टेक्नोलॉजी, जीआईएस, सैटेलाइट सिस्टम, रिमोट सेंसिंग और डिजास्टर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं के लिए भविष्य में रोजगार, अनुसंधान और स्टार्टअप के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। राज्य सरकार की यह पहल प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीकी दक्षता से लैस करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।