हरियाणा में सूचना आयुक्तों के 2 पद और रिक्त, कुलबीर छिकारा और जगबीर सिंह का 3 वर्ष कार्यकाल पूरा
चंडीगढ़- रविवार 12 अप्रैल 2026 को हरियाणा के दो राज्य सूचना आयुक्त (स्टेट इनफार्मेशन कमिश्नर) डॉ. कुलबीर छिकारा और डॉ. जगबीर सिंह का तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है. हरियाणा सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के 4 पद पहले से ही रिक्त हैं जिसके फलस्वरूप आगामी 13 अप्रैल से आयोग में सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों की संख्या बढ़कर 6 हो जायेगी.
रोचक परन्तु महत्वपूर्ण पॉइंट यह भी यह भी कि अप्रैल,2023 में सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति से पूर्व डॉ. छिकारा जून,2015 से जून,2021 तक अर्थात पूरे 6 वर्षो तक हरियाणा लोक सेवा आयोग ( एच.पी.एस.सी.) के सदस्य भी रहे थे हालांकि गत तीन वर्षो में किसी ने भी इस आधार पर डॉ. छिकारा की सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति को अदालत में चुनौती नहीं दी.
गत वर्ष मार्च, 2025 में हरियाणा के सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत प्रशासनिक सुधार शाखा द्वारा हरियाणा सूचना आयोग, जो सूचना का अधिकार (आर.टी.आई.) कानून, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत गठित किया गया है, में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के एक पद और राज्य सूचना आयुक्तों के सात पदों के लिए योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किये गए थे.
हालांकि मई,2025 में प्रदेश सरकार के पूर्व मुख्य सचिव टी.वी.एस.एन. प्रसाद को राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और चार अन्य नामत: रिटायर्ड एच.सी.एस. अधिकारी अमरजीत सिंह, कर्मवीर सैनी, नीता खेड़ा और संजय मदान को राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया हालांकि एक अन्य चयनित प्रियंका धूपड का नाम आखिरी समय में कुछ विवाद के चलते हटा दिया गया था. बहरहाल, मई,2025 में नियुक्त उपरोक्त पांचो का कार्यकाल मई, 2028 तक है.
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट और संवैधानिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि डॉ. छिकारा की तरह ही नीता खेड़ा, जो मूलतः अम्बाला कैंट से हैं, वह भी सूचना आयुक्त बनने से पहले अगस्त, 2016 से अगस्त, 2022 अर्थात पूरे 6 वर्षो तक एच.पी.एस.सी. की सदस्य रही थी. बेशक राज्य सूचना आयुक्त का पद एक वैधानिक पद है परंतु देश के संविधान के अनुच्छेद 319 (डी) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग में सदस्य रह चुका व्यक्ति केवल यू.पी.एस.सी. ( संघ लोक सेवा आयोग) का चेयरमैन या सदस्य या किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग का चेयरमैन ही बन सकता है एवं इसके अतिरिक्त उस व्यक्ति की केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी पद पर नियुक्ति नहीं हो सकती है. सनद रहे कि आज तक केंद्र सरकार ने भी यू.पी.एस.सी. का सदस्य रह चुके किसी व्यक्ति को केंद्रीय सूचना आयोग में बतौर सूचना आयुक्त नियुक्त नहीं किया है.
हेमंत ने आगे बताया कि आर.टी.आई. अधिनियम, 2005 अनुसार राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा अधिकतम 10 सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की जा सकती है. चूँकि चार माह पूर्व दिसम्बर, 2025 में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के साथ साथ आठ सूचना आयुक्तों की एक साथ नियुक्ति की गई थी, इसलिए ऐसी भी सम्भावना है कि हरियाणा में भी सूचना आयुक्तों के सभी 6 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया आरम्भ कर दी जाए.
मौजूदा कानूनी प्रावधानों अनुसार सूचना आयुक्त का कार्यकाल पदभार संभालने से तीन वर्ष या उसकी आयु 65 वर्ष होने तक, जो भी पहले हो, तक होता है. हालांकि वर्ष 2019 से पहले, अर्थात संसद द्वारा आर.टी.आई. कानून में किये गये संशोधन के लागू होने से पूर्व, इस कार्यकाल की समय अवधि तीन वर्ष की बजाय पांच वर्ष होती थी.
बहरहाल, हेमंत ने आगे बताया कि आर.टी.आई. कानून, 2005 के अनुसार मौजूदा तौर पर राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त दोनों पदों का वेतन सवा दो लाख रुपये प्रतिमाह है. कानून में उक्त पदों की योग्यता के बारे में उल्लेख है कि वह विधि (कानून), विज्ञान-प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता , जनसंपर्क माध्यम, प्रशासन और शासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले समाज के प्रख्यात व्यक्ति होंगे. इस प्रकार राज्य सूचना आयुक्तों के पदों पर रिटायर्ड आई.ए.एस., आई.पी.एस., एच.सी.एस., शिक्षाविद, वकील, वरिष्ठ पत्रकार आदि बुद्धिजीवी वर्गों से नियुक्ति होगी. हालांकि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर मुख्य सचिव अथवा डी.जी.पी.(पुलिस महानिदेशक) रैंक के सेवानिवृत अधिकारी की मजबूत दावेदारी बनती है.
राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के प्रक्रिया के सम्बन्ध में हेमंत ने बताया कि सर्वप्रथम प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों की सर्च कमेटी, जिसके प्रमुख प्रदेश के मुख्य सचिव होता हैं, जितने भी इन पदों के लिए आवेदन प्राप्त होते हैं उनमें से जितने रिक्त पदों को भरा जाना है, उससे तीन गुना नामों को शॉर्टलिस्ट करती है. सर्च कमेटी द्वारा शॉर्टलिस्ट किये गए पैनल में से प्रदेश के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय वैधानिक कमेटी जिसमें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री भी शामिल होता है, यह कमेटी सूचना आयोग के पदों पर फाइनल चयन करती है. कानूनन नेता प्रतिपक्ष का उक्त कमेटी में होना अनिवार्य है, उसकी अनुपस्थिति में फाइनल चयन नहीं हो सकता.