भेड़-बकरी पालक उत्थान योजना के तहत नि:शुल्क पशु उपलब्ध कराएगा पशुपालन विभाग
सिरसा, 08 मई । पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भेड़-बकरी पालक उत्थान योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को भेड़ एवं बकरी पालन के लिए पशु उपलब्ध करवाए जाएंगे, ताकि वे स्वरोजगार स्थापित कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।
सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को पशुपालन व्यवसाय से जोडक़र उनकी आय में वृद्धि करना है। योजना के जरिए लाभार्थियों को पशुपालन के लिए आवश्यक सहायता भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
कौन कर सकता है आवेदन
योजना के तहत आवेदन करने वाले लाभार्थी की आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक हरियाणा का निवासी होना आवश्यक है। इसके लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता या प्रशिक्षण की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। यह योजना व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए है, इसलिए किसी समूह, फर्म या संगठन को आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी। आवेदक को पोर्टल पर स्वयं-घोषणा पत्र भी देना होगा कि वह योजना की सभी शर्तों का पालन करेगा।
योजना के तहत क्या मिलेगा लाभ
इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा लाभार्थी को 15+1 बकरी (15 मादा+1 नर) अथवा 15 +1 भेड़ (15 मादा+1 नर) नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके साथ हरा चारा और साल्ट ब्लॉक जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी। एक वर्ष बाद जब लाभार्थी के पास पशुओं की संख्या बढक़र लगभग 40 से 50 हो जाएगी, तब उसमें से 10 मादा पशु और एक नर पशु वापस लिए जाएंगे। इन पशुओं को आगे अन्य नए लाभार्थियों को योजना के तहत प्रदान किया जाएगा।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड अनिवार्य होंगे। इसके अतिरिक्त आवेदक को स्वयं-घोषणा पत्र तथा डेढ़ वर्ष बाद एक नर और दस मादा पशुओं की वापसी से संबंधित शपथ पत्र भी देना होगा। साथ ही पशुओं के लिए शेड निर्माण हेतु खाली स्थान उपलब्ध होने का प्रमाण भी देना आवश्यक रहेगा।
स्वरोजगार की दिशा में बड़ा कदम
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपनिदेशक डा. सुखविंद्र सिंह ने बताया कि पशुपालन विभाग की यह योजना ग्रामीण बेरोजगार युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। भेड़ और बकरी पालन कम लागत में शुरू होने वाला व्यवसाय माना जाता है, जिससे लाभार्थी नियमित आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।