ये रहे सबसे ज्यादा कमाई वाले Toll Plaza, यहां देखें लिस्ट
कुल टोल कलेक्शन का ये आंकड़ा बिलकुल फ्रेश है, लेकिन टॉप टोल प्लाजा का सबसे ताजा और विस्तृत ब्रेकडाउन अब भी 2019-20 से 2023-24 के 5 वर्षों का ही उपलब्ध है. इस डेटा को भी MoRTH द्वारा लोकसभा में मार्च 2025 में पेश किया गया था. तब कुल टोल कलेक्शन 1.93 लाख करोड़ रुपये था. 2024-25 के लिए स्पेसिफिक टॉप इंडिविजुअल प्लाजा का अलग से अपडेटेड लिस्ट MoRTH या NHAI द्वारा अभी सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है. विभिन्न सरकारी आंकड़ों पर आधारित डेटा हम यहां शेयर कर रहे हैं.
भारथाना टोल प्लाजा
भारथाना टोल प्लाजा (Bharthana) गुजरात में स्थित है और यह नेशनल हाइवे-48 (एनएच-48) पर वडोदरा-भरूच (Vadodara-Bharuch) स्ट्रेच पर आता है. यह भारत का सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा है, जहां 2019-20 से 2023-24 तक कुल 2,043.81 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ, जिसमें 2023-24 में ही 472.65 करोड़ रुपये शामिल हैं. ज्यादा कलेक्शन की मुख्य वजह यहां का भारी ट्रैफिक है, जिसमें सालाना 1 करोड़ से ज्यादा वाहन गुजरते हैं, जिनमें ज्यादातर कमर्शियल ट्रक और फ्रेट वाहन होते हैं. गुजरात के मैन्युफैक्चरिंग हब और पोर्ट्स (जैसे कांडला और मुंद्रा) से जुड़ाव के कारण यह रूट इंडस्ट्रियल ट्रांसपोर्ट का प्रमुख कॉरिडोर है, जो दिल्ली-मुंबई हाइवे का हिस्सा होने से लगातार व्यस्त रहता है.
जलधुलागोरी टोल प्लाजा
जलधुलागोरी टोल प्लाजा (Jaladhulagori) पश्चिम बंगाल में स्थित है और एनएच-16 पर धनकुनी-खड़गपुर (Dhankuni-Kharagpur) स्ट्रेच पर है. यह तीसरे स्थान पर है, जहां 2019-20 से 2023-24 तक 1,538.91 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज हुआ. ज्यादा कमाई की वजह यहां का हाई ट्रैफिक है, जो कोलकाता को चेन्नई और अन्य ईस्टर्न स्टेट्स से जोड़ता है, जिसमें ट्रक, बसें और कार्गो वाहन प्रमुख हैं. हावड़ा के पास होने से पोर्ट्स जैसे हल्दिया और कोलकाता पोर्ट से जुड़े फ्रेट मूवमेंट बढ़ते हैं, जो इंडस्ट्रियल और कमर्शियल एक्टिविटी को सपोर्ट करता है. यह रूट ईस्ट कोस्ट हाइवे का हिस्सा है, जहां मौसमी ट्रैफिक (जैसे मानसून में) और कंस्ट्रक्शन से जाम होता है, लेकिन FASTag ने कलेक्शन को एफिशिएंट बनाया है.
बाराजोर टोल प्लाजा
बाराजोर टोल प्लाजा (Barajore) उत्तर प्रदेश में है और एनएच-19 पर इटावा-चकेरी (कानपुर) (Etawah-Chakeri (Kanpur)) स्ट्रेच पर स्थित है. यह चौथे स्थान पर है, जहां पांच वर्षों में 1,480.75 करोड़ रुपये इकट्ठे हुए. हाई कलेक्शन का मुख्य कारण ग्रैंड ट्रंक रोड का हिस्सा होना है, जो दिल्ली को कोलकाता से जोड़ता है, जिससे हेवी कमर्शियल ट्रैफिक जैसे ट्रक और गुड्स कैरियर्स का फ्लो लगातार रहता है. कानपुर के इंडस्ट्रियल जोन और यूपी के एग्रीकल्चरल हब से जुड़ाव से फ्रेट मूवमेंट बढ़ता है, खासकर माल ढुलाई के लिए. यह रूट ईस्टर्न इंडिया के लिए क्रिटिकल है.
शाहजहांपुर टोल प्लाजा
शाहजहांपुर टोल प्लाजा (Shahjahanpur) राजस्थान में है और एनएच-48 पर गुड़गांव-कोटपूतली-जयपुर (Gurgaon-Kotputli-Jaipur) स्ट्रेच को कवर करता है. यह टॉप 10 में दूसरे स्थान पर है, जहां पिछले पांच वर्षों में 1,884.46 करोड़ रुपये का टोल इकट्ठा हुआ. हाई कलेक्शन का कारण इसकी स्ट्रेटेजिक लोकेशन है, जो दिल्ली-एनसीआर को जयपुर और आगे मुंबई से जोड़ती है, जिससे डेली कम्यूटर्स, टूरिस्ट्स और कमर्शियल वाहनों का भारी फ्लो रहता है. यह दिल्ली-जयपुर हाइवे का हिस्सा होने से कमर्शियल और टूरिस्ट ट्रैफिक को आकर्षित करता है. राजस्थान के इकोनॉमिक ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ने ट्रैफिक वॉल्यूम बढ़ाया है, लेकिन मौसमी जाम और मेंटेनेंस से कभी-कभी देरी होती है. यह प्लाजा बैरियर-फ्री टोलिंग के पायलट प्रोजेक्ट्स में भी शामिल है, जो भविष्य में कलेक्शन को और सुगम बनाएगा.
घरौंडा टोल प्लाजा
घरौंडा टोल प्लाजा (Gharaunda) हरियाणा में है और एनएच-44 पर पानीपत-जालंधर (Panipat-Jalandhar) स्ट्रेच पर आता है. यह पांचवें स्थान पर है, जहां 2019-20 से 2023-24 तक 1,314.37 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन हुआ. ज्यादा कमाई की वजह दिल्ली-चंडीगढ़ कॉरिडोर का हिस्सा होना है, जो कम्यूटर्स, टूरिस्ट्स और फ्रेट ट्रैफिक को आकर्षित करता है. हरियाणा के इंडस्ट्रियल एरिया जैसे पानीपत और दिल्ली-एनसीआर से जुड़ाव से हेवी वाहनों का फ्लो बढ़ता है, खासकर गुड्स ट्रांसपोर्ट के लिए. यह रूट नॉर्थ इंडिया का मेजर हाइवे है, जहां रोज हजारों वाहन गुजरते हैं. बैरियर-फ्री टोलिंग का पायलट यहां चल रहा है, जो जाम कम करके कलेक्शन को बढ़ाएगा, लेकिन पॉटहोल्स और कंस्ट्रक्शन से चुनौतियां हैं.
चोरयासी टोल प्लाजा
चोरयासी टोल प्लाजा (Choryasi) गुजरात में स्थित है और एनएच-48 पर भरूच-सूरत (Bharuch-Surat) स्ट्रेच पर है. यह छठे स्थान पर है, जहां अनुमानित रूप से 1,261 करोड़ रुपये का कलेक्शन पांच वर्षों में हुआ. उच्च कलेक्शन का कारण व्यस्त फ्रेट कॉरिडोर होना है, जो सूरत के टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री को पोर्ट्स से जोड़ता है, जिससे ट्रक और कमर्शियल वाहनों का भारी ट्रैफिक रहता है. दिल्ली-मुंबई हाइवे का हिस्सा होने से दैनिक यातायात बढ़ता है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट एक्टिविटी से. यह भारत का पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा है, जहां MLFF सिस्टम से वाहन बिना रुके गुजरते हैं, जो कलेक्शन को एफिशिएंट बनाता है. गुजरात के इकोनॉमिक ग्रोथ ने ट्रैफिक वॉल्यूम को बढ़ाया, लेकिन कभी-कभी जाम से देरी होती है.