Haryana: हरियाणा में 8 DA को ADP पद पर पदोन्नत करने पर विवाद, जाने पूरा मामला ?
जिन 8 डी.ए. को ए.डी.पी. के तौर पर पदोन्नत किया गया है उनमें भूपेंद्र अहलावत, धर्मचन्द, राजेंद्र, महिपाल, अजय कुमार, दिनेश सभरवाल, रमणीक यादव और पंकज शामिल है. अढ़ाई महीने पूर्व 31 दिसम्बर 2025 को इसी प्रकार हरियाणा के गृह विभाग की तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव ( ए.सी.एस.) डॉ. सुमिता मिश्रा द्वारा 22 जिला न्यायवादी (डी.ए.) को हालांकि एक ही बार में डबल प्रमोशन का अभूतपूर्व लाभ प्रदान कर अर्थात बगैर सहायक निदेशक अभियोजन (ए.डी.पी.) पद पर प्रमोट किये सीधा ही उप निदेशक निदेशक अभियोजन (डिप्टी डायरेक्टर ऑफ़ प्रॉसिक्यूशन- डी.डी.पी.) के पद पर पदोन्नत कर दिया गया था जिसके विरूद्ध गत जनवरी माह में हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गयी थी जिसकी अगली सुनवाई आगामी 30 मार्च को निर्धारित है.
बहरहाल, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने गत दिवस 12 मार्च को हरियाणा सरकार को एक ताज़ा कानूनी नोटिस भेजकर उपरोक्त 8 डी.ए. को ए.डी.पी. के पद पर पदोन्नत किए जाने पर कानूनी आपत्ति दर्ज कराई है. उनका दावा है कि इससे प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे उन सभी वकीलों के साथ, जो सात या उससे अधिक वर्षो से वकालत कर रहे हैं, के साथ घोर अन्याय हुआ है, क्योंकि उन्हें ए.डी.पी. के पदों पर नियुक्ति के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर भी नहीं दिया गया जबकि देश की संसद द्वारा अधिनियमित और 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 20(2)(बी) अनुसार ए.डी.पी. के पद पर नियुक्त होने के लिए वही व्यक्ति पात्र होगा जो कम से कम सात वर्षों से अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहा हो या प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) मजिस्ट्रेट रह चुका हो.
हेमंत ने बताया कि गत वर्ष 18 दिसंबर 2025 को हरियाणा सरकार के गृह विभाग द्वारा हरियाणा राज्य अभियोजन विभाग विधिक सेवा (ग्रुप ए) नियमावली, 2013 में संशोधन कर उसमें डी.डी.पी. (डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन) और ए.डी.पी. के पदों को शामिल किया गया. ए.डी.पी. के पद पर नियुक्ति के लिए प्रमोशन मार्फ़त उन डी.ए. को योग्य बनाया गया जो न्यूनतम तीन वर्ष डी.ए. के तौर पर सेवा कर चुके हो.
हालांकि इसके साथ ही प्रदेश सरकार और भारत सरकार में नियुक्त उपयुक्त अधिकारियों के ट्रांसफर या प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन ) आधार द्वारा भी ए.डी.पी. की नियुक्ति करने का उल्लेख किया गया परन्तु न्यूनतम सात वर्षो की प्राइवेट प्रैक्टिस वाले वकीलों और फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट में से ए.डी.पी. के पद पर सीधी भर्ती सम्बन्धी व्यवस्था नहीं की गई है.
अंतत: एडवोकेट हेमंत ने अपने कानूनी नोटिस में लिखा है कि यदि 8 डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी, जिन्हें 11 मार्च को बतौर ए.डी.पी. पदोन्नत किया गया है, की उनके पूर्व पदों पर पदावनति करके और तत्पश्चात बी.एन.एस.एस., 2023 की धारा 20(2)(बी) की कड़ाई से अनुपालन करते हुए खुली भर्ती/चयन द्वारा, अर्थात सभी योग्य वकीलों (कम से कम सात वर्ष की प्रैक्टिस वाले) और फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट से आवेदन आमंत्रित करके, ए.डी.पी. के सभी नव-सृजित / स्वीकृत पदों को नहीं भरा जाता है, तो वह माननीय पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रिट क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए, इस मामले में उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का सहारा लेने के लिए बाध्य होंगे एवं वह जनहित याचिका (पी.आई.एल.) दायर कर सकते है.