Charger: अक्सर हम अपने फोन को चार्ज करने के बाद उसे प्लग में ऐसे हो ऑन छोड़ देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसी में यह चार्जर कितनी बिजली खाता है? आपको बता दें ये छोटा सा चार्जर हर दिन कछुए की चाल में थोड़ा-थोड़ा करके आपकी जेब ढीली कर रहा है। दरअसल ऐसा नहीं है कि एक चार्जर सिर्फ तभी बिजली खींचता है जब वह फोन को चार्ज कर रहा हो। एक चार्जर प्लग में खाली लगे हुए भी बिजली का मीटर घुमा रहा होता है। आइए आपको बता दें कि फोकट में प्लग में बैठ कर बिजली चूस रहे चार्जर आपकी कितनी जेब ढ़ीली कर रहा हैं।
जानें कितनी यूनिट खाता फोकट में फूंकी
जब तक चार्जर में फोन नहीं लगा है तब तक वह कोई बिजली नहीं खाता, अक्सर अधिकतर लोग यही सोचते हैं जो कि सरासर गलत है। आपको बता दें कि हर सार इस लापरवाही से 22 करोड़ बिलजी यूनिट बेकरा में खर्च कर दी जाती है। यानी कि रोज की 6 लाख 3 हजार यूनिट प्लग ऑन छोड़ देने खर्च होते है। भारत में लोगों की इस लापरवाही से हर सेकेंड 419 यूनिट बिजली खप जाती है। अगर यह बिजली की यूनिट वाले आंकड़े से कुछ समझ में न आ रहो हो, तो चलिए पैसों की बात कर लेते हैं। भारत में रुपयों की भाषा सभी जल्दी समझ लेते हैं।
कितने रुपये हुए स्वाहा?
इस लापरवाही से साल भर में 220 करोड़ की बिजली खर्च हो जाती है। अगर एक अकेले मोबाइल फोन की बात करें, तो यह साल भर में एक मोबाइल फोन चार्ज होने में 150 रुपये की बिजली खर्च करता है।
बिजली की दर औसतन 6 रुपये प्रति यूनिट
प्लंग में लगा एक खाली चार्जर एक दिन में लगभग 7.2 वाट बिजली फूंक देता है। इससे लगभग 0.0072 यूनिट प्रति दिन खर्च होती है। भारत में घरेलू बिजली की दर औसतन 6 रुपये प्रति यूनिट है। हालांकि यह अलग-अलग राज्यों में कम या ज्यादा हो सकती है। इस लिहाज से एक खासी चार्ज एक दिन में 4 पैसे की बिजली खा जाता है। एक महीने का यह खर्च 1.30 रुपये बैठता है। सालभर में यह प्रति व्यक्ति लगभग 15.60 रुपये हो जाता है।