10वीं क्लास में CBSE ने बदले पास होने के नियम, अब केवल थ्योरी से नहीं चलेगा काम
मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में कक्षा 10 के विद्यार्थियों को पास होने के लिए थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट मिलाकर कुल 33% अंक प्राप्त करने होते थे। लेकिन अब बोर्ड ने इसे दो अनिवार्य खंडों में विभाजित कर दिया है। थ्योरी यानी लिखित परीक्षा के तहत मुख्य परीक्षा में न्यूनतम 33% अंक लाना अनिवार्य होगा। Education Quality
जानकारी के मुताबिक, इसी तरह आंतरिक मूल्यांकन में प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल और असाइनमेंट में न्यूनतम 33% अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि कोई छात्र इंटरनल में बहुत अच्छे अंक लाता है, लेकिन थ्योरी में 33% से कम रह जाता है, तो उसे उत्तीर्ण नहीं माना जाएगा। यही नियम इंटरनल असेसमेंट पर भी लागू होगा।
यह निर्णय
मिली जानकारी के अनुसार, इस नई शिक्षा नीति (एनईपी) से छात्रों को केवल अंतिम परीक्षा के भरोसे बैठने के बजाय पूरे साल नियमित पढ़ाई के लिए प्रेरित करना है। इससे सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (सीसीई) की प्रासंगिकता बढ़ेगी और छात्रों की रचनात्मकता व व्यावहारिक ज्ञान में सुधार होगा। Education Quality
जरूरी दिशा-निर्देश
जानकारी के मुताबिक, बोर्ड के इस बदलाव के बाद अब विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। छात्रों को केवल रटने की प्रवृत्ति छोड़नी होगी। अब प्रोजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल को गंभीरता से लेना होगा, क्योंकि यहां मिली असफलता आपके पूरे साल के परिणाम को प्रभावित कर सकती है। शिक्षकों को अब थ्योरी के साथ-साथ कक्षा की गतिविधियों और निरंतर मूल्यांकन पर अधिक ध्यान देना होगा। Education Quality
मिली जानकारी के अनुसार, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र हर स्तर पर अवधारणाओं (कांसेप्टों) को समझें। अभिभावकों को बच्चों पर केवल बोर्ड परीक्षा के दौरान दबाव बनाने के बजाय, पूरे साल उनके प्रदर्शन और स्कूल में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखनी होगी। वहीं स्कूलों को अपनी शैक्षणिक योजना में थ्योरी और प्रैक्टिकल का उचित संतुलन बनाना होगा और आंतरिक मूल्यांकन की पारदर्शिता बनाए रखनी होगी